बनारस कचहरी के लाल भवन में गूंजे आजादी के नारे, धानापुर कांड के 71 क्रांतिकारियों को अधिवक्ताओं ने किया याद

~ अदालत जहां लगता था क्रांतिकारियों का मेला
~ वहां अधिवक्ताओं ने जलाए दिये
~ अदालत कक्ष मे लगा भारत माता की जय वन्दे मातरम के नारे
~ आजादी की सुबह ने जब रोक दी तीन क्रातिकारियो की फांसी
वाराणसी। बनारस कचहरी का लाल भवन आजादी के आंदोलन की कई ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह रहा है। इसी भवन पर 11 अगस्त 1942 को काशी में पहली बार तिरंगा फहराया गया था। कचहरी का प्रथम तल स्थित वह अदालत कक्ष भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है, जहां धानापुर कांड से जुड़े 71 क्रांतिकारियों के खिलाफ ब्रिटिश शासन के दौरान मुकदमा चलाया गया था।
धानापुर कांड के 71 क्रांतिकारियों को हथकड़ियों में जकड़कर इसी अदालत में पेश किया जाता था। उन पर राजद्रोह, हत्या और लूट सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमे चलाए गए थे। इसी ऐतिहासिक घटना की याद में अदालत कक्ष के सामने एक शिलालेख भी लगाया गया है।
गुरुवार शाम करीब चार बजे बनारस बार के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय और गौतम झा के नेतृत्व में अधिवक्ताओं का एक जत्था ऐतिहासिक अदालत कक्ष के सामने पहुंचा। यहां अधिवक्ताओं ने शिलालेख के सामने चंद्रशेखर आजाद, छत्रपति शिवाजी और रानी लक्ष्मीबाई समेत स्वतंत्रता सेनानियों के चित्र सजाकर दीप प्रज्ज्वलित किए। अधिवक्ताओं ने हाथों में तिरंगा लेकर भारत माता की जय, वंदे मातरम और धानापुर के स्वतंत्रता सेनानी अमर रहें के नारे लगाए।
मुख्य वक्ता नित्यानंद राय ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन के आह्वान के बाद 16 अगस्त को धानापुर थाने पर तिरंगा फहराने का निर्णय लिया गया था। तिरंगा फहराने के दौरान ब्रिटिश सरकार की पुलिस ने क्रांतिकारियों पर गोलीबारी कर दी, जिसमें तीन लोग शहीद हो गए। इसके बाद क्रांतिकारियों की ओर से हुई कार्रवाई में थानेदार समेत चार पुलिसकर्मियों की मौत हुई। धानापुर की इस घटना को काशी का चौरीचौरा कांड भी कहा जाता है।
धानापुर कांड की सुनवाई पूरी होने के बाद तत्कालीन अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नियाज अहमद ने 15 दिसंबर 1944 को फैसला सुनाया। कुल 71 आरोपियों में से 55 को दोषी पाया गया, जबकि 15 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया। तीन आरोपियों—सूर्यमणि सिंह उर्फ मन्नी सिंह, हरनारायण अग्रहरी और देव सागर सिंह—को मृत्यु दंड की सजा सुनाई गई। इसके अलावा 16 आरोपियों को आजीवन कारावास, 28 को दस वर्ष का कठोर कारावास, सात को सात वर्ष और एक आरोपी को पांच वर्ष की सजा सुनाई गई।
देश की आजादी के बाद इन क्रांतिकारियों की सजा का अंत हुआ और दोषसिद्ध सभी लोगों को रिहा कर दिया गया। इस तरह आजादी की सुबह ने धानापुर के स्वतंत्रता सेनानियों को नया जीवन दिया।
शहीदों की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में बनारस बार के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय, सेंट्रल बार के पूर्व महामंत्री सुरेंद्र पांडे, गौतम झा, विनय कुमार राय मुन्ना, विनोद पांडे भैयाजी, राजीव सिन्हा, समीर मिश्रा, सुनील सिंह, अमरनाथ पुरी, मंगला प्रसाद, विनय मौर्य, शिव समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।




