Varanasi

Varanasi: अधूरे हाईवे पर टोल वसूली के विरोध में 30 सितंबर को धरना, पूर्वांचल किसान संगठन ने दी चेतावनी

ढेरही टोल प्लाजा बंद कराने, भारी वाहनों पर ‘नो एंट्री’ लगाने और किसानों के लंबित मुआवजे के भुगतान की मांग; 15 सितंबर तक कार्रवाई का अल्टीमेटम

विवेक राय, वाराणसी 

 

 

वाराणसी/डोभी। राष्ट्रीय राजमार्ग-233 (वाराणसी-आजमगढ़ मार्ग) पर ढेरही, बलरामगंज स्थित टोल प्लाजा को लेकर पूर्वांचल किसान संगठन ने एक बार फिर आंदोलन का ऐलान किया है। संगठन का आरोप है कि टोल प्लाजा से करीब दो किलोमीटर आगे तक हाईवे का निर्माण अधूरा होने के बावजूद वाहन चालकों से टोल टैक्स की वसूली की जा रही है। संगठन ने इस मामले में जिलाधिकारी वाराणसी को ज्ञापन देकर 30 सितंबर 2026 को ढेरही टोल प्लाजा पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।

संगठन की ओर से प्रशासन को 15 सितंबर 2026 तक प्रभावी कार्रवाई करने का समय दिया गया है। मांगें पूरी नहीं होने पर किसान, नौजवान और विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ आंदोलन करने की बात कही गई है।

 

 

तीन बार हो चुका है धरना-प्रदर्शन

जानकारी के मुताबिक, ढेरही टोल प्लाजा और अधूरे हाईवे को लेकर पूर्वांचल किसान संगठन एवं क्षेत्रीय लोगों की ओर से पहले भी आंदोलन किया जा चुका है। संगठन का दावा है कि 21 फरवरी 2024, 15 सितंबर 2024 और 23 मार्च 2025 को शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया गया था।

इन आंदोलनों के दौरान वाराणसी और जौनपुर प्रशासन के अधिकारियों के साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े अधिकारियों की मौजूदगी में मामले को लेकर वार्ता और स्थलीय निरीक्षण किए जाने का दावा किया गया है। संगठन का कहना है कि निरीक्षण के दौरान टोल प्लाजा से करीब दो किलोमीटर आगे सड़क निर्माण अधूरा पाया गया था।

स्थानीय वाहनों को टोल से राहत की मांग

संगठन के अनुसार, अधूरे मार्ग की स्थिति को देखते हुए चोलापुर, केराकत और डोभी क्षेत्र के निजी एवं व्यावसायिक वाहनों को टोल टैक्स से राहत दिए जाने की व्यवस्था की गई थी। हालांकि, संगठन का आरोप है कि करीब दो वर्ष बाद स्थानीय लोगों से दोबारा टोल वसूली की शिकायतें सामने आ रही हैं।

ज्ञापन में टोल वसूली के दौरान वाहन चालकों से कथित दबाव और विवाद की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। संगठन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

अधूरे 16 किलोमीटर मार्ग पर भारी वाहनों को लेकर चिंता

ज्ञापन में जौनपुर जनपद में राष्ट्रीय राजमार्ग-233 के करीब 16 किलोमीटर हिस्से के अधूरे होने का दावा किया गया है। संगठन का कहना है कि अधूरे मार्ग पर डंपर, ट्रक और अन्य भारी वाहनों के आवागमन से दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है।

संगठन ने सड़क निर्माण पूरा होने तक अधूरे हिस्से पर भारी वाहनों के आवागमन को नियंत्रित करते हुए ‘नो एंट्री’ लागू करने की मांग की है। ज्ञापन में दुर्घटनाओं से प्रभावित परिवारों को उचित आर्थिक सहायता दिलाने की मांग भी रखी गई है।

किसानों के लंबित मुआवजे का मुद्दा भी उठाया

पूर्वांचल किसान संगठन ने हाईवे निर्माण के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे का मुद्दा भी उठाया है। संगठन का आरोप है कि कई किसानों को अब तक उनके मुआवजे और अन्य वैधानिक देयों का पूर्ण भुगतान नहीं हो सका है।

ज्ञापन में कहा गया है कि किसानों ने सड़क निर्माण के लिए अपनी कृषि भूमि दी है और इसके बावजूद उन्हें उसी मार्ग से आवागमन के लिए टोल देना पड़ रहा है। संगठन ने लंबित मुआवजे का तत्काल निस्तारण कराने की मांग की है।

रामगढ़ में प्रस्तावित टोल प्लाजा का भी हवाला

ज्ञापन में राष्ट्रीय राजमार्ग-233 के वर्ष 2012 से जुड़े प्रस्ताव का हवाला देते हुए रामगढ़, केराकत, जौनपुर में टोल प्लाजा प्रस्तावित किए जाने की बात कही गई है। संगठन का कहना है कि इसके लिए किसानों की भूमि भी अधिग्रहित की गई थी। इसके बावजूद ढेरही, बलरामगंज में टोल प्लाजा स्थापित किए जाने पर संगठन ने सवाल उठाए हैं।

15 सितंबर तक कार्रवाई नहीं हुई तो 30 सितंबर को आंदोलन

पूर्वांचल किसान संगठन के अजीत सिंह डोभी की ओर से जिलाधिकारी को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि यह मामला केवल टोल टैक्स तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों, ग्रामीणों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की सुरक्षा एवं आर्थिक हितों से जुड़ा है।

संगठन ने 15 सितंबर तक टोल वसूली, अधूरे मार्ग, स्थानीय वाहनों को टोल से राहत और लंबित मुआवजे समेत प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई की मांग की है। कार्रवाई नहीं होने पर 30 सितंबर 2026 को ढेरही टोल प्लाजा पर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक धरना-प्रदर्शन करने की चेतावनी दी गई है।

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