दालमंडी के बाद अब नावेद कॉम्प्लेक्स पर कार्रवाई की तैयारी? नगर निगम ने चस्पा किया नोटिस
निर्माण को अवैध बताते हुए 7 दिन की मोहलत, कार्रवाई के बाद शहर में अवैध निर्माणों पर उठे सवाल

अजय त्रिपाठी, वाराणसी
वाराणसी। दालमंडी में अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के बीच अब नावेद कॉम्प्लेक्स को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। नगर निगम की ओर से कॉम्प्लेक्स पर नोटिस चस्पा किए जाने के बाद सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले दिनों में इस निर्माण के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम ने निर्माण को नियमों के विपरीत बताते हुए संबंधित पक्ष को सात दिन की मोहलत दी है।

नोटिस के बाद बढ़ी हलचल
नगर निगम की कार्रवाई के बाद नावेद कॉम्प्लेक्स को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। नोटिस के जरिए निर्माण से संबंधित पक्ष से जवाब मांगा गया है। अब सात दिन की अवधि पूरी होने के बाद नगर निगम की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सभी की नजर है।

निर्माण अवैध है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर भी उठे सवाल
इस कार्रवाई के साथ एक बड़ा सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि यदि वर्तमान में किसी निर्माण को अवैध या मानकों के विपरीत बताया जा रहा है, तो जब इसका निर्माण हो रहा था उस समय संबंधित विभागों के अधिकारी क्या कर रहे थे?
निर्माण की अनुमति, नक्शे की स्वीकृति, निर्माण की निगरानी और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में समय रहते कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होती है। ऐसे में यदि जांच में निर्माण वास्तव में नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उस समय तैनात जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है।
शहर में अवैध निर्माणों पर VDA की कार्रवाई कब?
नावेद कॉम्प्लेक्स का मामला सामने आने के बाद शहर के दूसरे इलाकों में हो रहे निर्माणों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वाराणसी के कई क्षेत्रों में भवन निर्माण स्वीकृत मानकों और नियमों के विपरीत किए जा रहे हैं।
हालांकि, शहर में 90 प्रतिशत से अधिक निर्माण अवैध होने का दावा फिलहाल आधिकारिक आंकड़ों से पुष्ट नहीं है। लेकिन यदि बड़े पैमाने पर नियम विरुद्ध निर्माण हो रहे हैं, तो वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) को ऐसे मामलों का सर्वे कराकर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
सिर्फ कार्रवाई नहीं, जिम्मेदारी भी तय हो
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर कोई निर्माण वर्षों तक चलता रहा और बाद में उसे अवैध घोषित किया गया, तो सिर्फ वर्तमान मालिक या निर्माणकर्ता पर कार्रवाई पर्याप्त होगी या उस दौरान निगरानी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय होगी?
अब देखना होगा कि सात दिन की मोहलत पूरी होने के बाद नगर निगम नावेद कॉम्प्लेक्स के मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या इस कार्रवाई का असर शहर में अन्य कथित अवैध निर्माणों पर भी दिखाई देता है।




