Varanasi: मानक को ताक पर रखकर धड़ल्ले से हो रहा निर्माण, VDA के सुपरवाइज़र, JE, जोनल अधिकारी की भूमिका पर उठ रहे सवाल
लल्लापुरा चौकी के ठीक बगल में संकरी गली में बहुमंजिला इमारत के निर्माण पर उठे सवाल; स्वीकृत नक्शे, सेटबैक, पार्किंग और FAR की जांच की मांग, संबंधित जोन के JE, सुपरवाइजर व जोनल अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल

नीरज सिंह, वाराणसी
~ सिगरा थाना क्षेत्र के लल्लापुरा में स्वीकृत नक्शे, सेटबैक, पार्किंग और FAR की जांच की उठी मांग
~ सवालों के घेरे में VDA की निगरानी, राजस्व नुकसान की भी आशंका चौकी के ठीक बगल में चल रहे एक निर्माण कार्य को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
~ स्थानीय स्तर पर आरोप है कि VDA की टीम ने इस निर्माणाधीन भवन को कार्यवाही करते पहुंची टीम ने क्यों नहीं किया सील
~ जानकारी के अनुसार यहां बिना स्वीकृत मानचित्र/मानक के मौके पर धड़ल्ले से निर्माण हो रहा है
वाराणसी। सिगरा थाना क्षेत्र के लल्लापुरा चौकी के ठीक बगल में स्थित गली में बहुमंजिला इमारत का निर्माण कार्य चर्चा में है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि निर्माण में वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) के निर्धारित नियमों और भवन मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि प्राधिकरण की टीम ने पूर्व में इस निर्माणाधीन भवन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इसे सील करने पहुंची थी लेकिन विशेष कृपा बरसाते हुए उसे पर कोई कार्रवाई नहीं किया। इसके बावजूद निर्माण कार्य को लेकर उठ रहे सवालों ने प्राधिकरण की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि निर्माण स्वीकृत मानचित्र के विपरीत या बिना मानचित्र स्वीकृति के कराया जा रहा है, तो यह मामले की गंभीरता को और बढ़ाता है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि VDA निर्माणाधीन भवन के स्वीकृत मानचित्र, सेटबैक, पार्किंग व्यवस्था और फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) की निष्पक्ष जांच कराए तथा यह स्पष्ट करे कि निर्माण नियमानुसार हो रहा है या नहीं। चौकी के ठीक बगल में निर्माण होने के बावजूद संबंधित जोन के सुपरवाइजर, अवर अभियंता (JE) और जोनल अधिकारी की निगरानी तथा कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में VDA उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा के नेतृत्व में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, प्राधिकरण को यह भी स्पष्ट करना होगा कि सीलिंग की कार्रवाई के बाद निर्माण की स्थिति क्या रही और कहीं नियमों की अनदेखी से राजस्व को नुकसान तो नहीं हो रहा है।
उत्तर प्रदेश में लागू भवन निर्माण एवं विकास उपविधि-2025 के तहत किसी भी निर्माण में स्वीकृत मानचित्र, भूमि उपयोग, अनुमन्य FAR, सेटबैक, पार्किंग और अन्य तकनीकी प्रावधानों का पालन जरूरी है। हालांकि इन मानकों की वास्तविक स्थिति प्लॉट के आकार, सड़क की चौड़ाई, भवन के उपयोग और स्वीकृत नक्शे के आधार पर तय होती है।
चौकी के बगल में निर्माण, फिर भी निगरानी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस स्थान पर निर्माण कार्य चल रहा है, वह लल्लापुरा पुलिस चौकी के ठीक बगल में बताया जा रहा है। ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि यदि निर्माण वास्तव में मानकों के विपरीत है तो संबंधित विभाग की नजर अब तक इस पर क्यों नहीं पड़ी?
स्थानीय लोगों की मांग है कि VDA की प्रवर्तन टीम मौके पर पहुंचकर निर्माण का भौतिक सत्यापन करे और स्वीकृत नक्शे से मौके पर हुए निर्माण का मिलान कराए। साथ ही यह भी जांच हो कि भवन में निर्धारित सेटबैक छोड़ा गया है या नहीं, पार्किंग की व्यवस्था नियमों के मुताबिक है या नहीं और निर्माण अनुमन्य FAR के भीतर है या उससे अधिक।
नियम तोड़कर निर्माण हुआ तो सरकारी राजस्व को भी नुकसान
नियमों को दरकिनार कर निर्माण होने की स्थिति में केवल भवन मानकों के उल्लंघन का सवाल नहीं उठता, बल्कि संबंधित शुल्क, कंपाउंडिंग अथवा अन्य वैधानिक देयताओं से जुड़े राजस्व पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि इस मामले में सरकारी राजस्व को वास्तविक कितना नुकसान हुआ है, यह संबंधित विभाग की जांच और अभिलेखों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगा।
VDA अपनी हालिया कार्रवाई में भी स्पष्ट कर चुका है कि स्वीकृत मानचित्र और निर्धारित शर्तों के विपरीत निर्माण अथवा भूमि उपयोग परिवर्तन विधि-विरुद्ध है। प्राधिकरण ने अवैध निर्माण पाए जाने पर नोटिस, सीलिंग और अन्य वैधानिक कार्रवाई का प्रावधान बताया है।
अब देखना होगा VDA कब करेगा जांच
लल्लापुरा में पुलिस चौकी के ठीक बगल में चल रहे इस निर्माण को लेकर अब निगाहें वाराणसी विकास प्राधिकरण की प्रवर्तन कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या मौके का निरीक्षण कर यह जांच की जाएगी कि निर्माण स्वीकृत मानचित्र और मौजूदा भवन उपविधियों के अनुरूप है या नहीं?
अगर निर्माण मानकों के विपरीत पाया जाता है तो सवाल यह भी होगा कि जिम्मेदार अधिकारियों की नजर से यह निर्माण अब तक कैसे बचा रहा।
अब देखना यह है कि VDA इस मामले में मौके पर जांच करता है या फिर नियमों की किताब में दर्ज प्रावधान सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाते हैं।




