
धर्मेंद्र कुमार, चन्दौली
चन्दौली/वाराणसी, 12 मई 2026। वीडीए (Varanasi Development Authority) की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। चंदौली जिले के मुगलसराय और अलीनगर थाना क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध प्लॉटिंग का कारोबार खुलेआम जारी है। आरोप है कि बिना किसी रोक-टोक के अवैध कॉलोनाइजर कृषि और सरकारी जमीनों पर प्लॉटिंग कर लोगों को जमीन बेच रहे हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन और वीडीए की मिलीभगत के बिना इतने बड़े स्तर पर अवैध प्लॉटिंग संभव नहीं है।
दो दर्जन से अधिक स्थानों पर चल रही अवैध प्लॉटिंग
जानकारी के अनुसार मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र के हिनौली, हरिशंकरपुर, छेमिया, काली महाल और चंधासी समेत कई इलाकों में अवैध प्लॉटिंग का काम जोरों पर चल रहा है। वहीं अलीनगर थाना क्षेत्र के पचफेडवा, आलू मिल, रेमा और रेवासा क्षेत्रों में भी दर्जनों प्लॉटर नियमों को ताक पर रखकर प्लॉट बेच रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकांश प्लॉटिंग बिना मानचित्र स्वीकृति और बिना किसी वैध अनुमति के की जा रही है। कई जगहों पर न तो सड़क की समुचित व्यवस्था है और न ही पानी निकासी या बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके बावजूद प्लॉटर छोटे-छोटे प्लॉट काटकर ऊंचे दामों में बेच रहे हैं।
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किसानों और खरीदारों दोनों की बढ़ रही परेशानी
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध प्लॉटर किसानों से सस्ते दामों में जमीन खरीद लेते हैं और फिर उसे कई गुना कीमत पर बेचकर मुनाफा कमाते हैं। प्लॉट खरीदने वाले लोग बाद में सड़क, नाली, बिजली और पानी जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझते रहते हैं। कई मामलों में सरकारी जमीनों पर भी कब्जा कर प्लॉटिंग किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
किसानों का आरोप है कि खेती योग्य जमीन तेजी से आवासीय प्लॉट में बदली जा रही है, जिससे कृषि भूमि लगातार कम हो रही है। वहीं आम लोगों को वैध कॉलोनी के नाम पर भ्रमित कर अवैध प्लॉट बेचे जा रहे हैं।

वीडीए अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वीडीए अधिकारी सिर्फ औपचारिक जांच कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर अवैध प्लॉटिंग लगातार जारी रहती है। लोगों का आरोप है कि अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से ही यह पूरा नेटवर्क फल-फूल रहा है।
मुगलसराय में कई बड़े निर्माण कार्य मानकों के विपरीत कराए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारी द्वारा कुछ भवनों को सील भी किया गया, लेकिन कार्रवाई के बावजूद कथित मिलीभगत के चलते निर्माण कार्य लगातार जारी रहने के आरोप लग रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सीलिंग के बाद भी मौके पर निर्माण नहीं रुक रहा, तो आखिर ऐसी कार्रवाई का क्या औचित्य है जो केवल कागजी प्रक्रिया बनकर रह जाए।
अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर वीडीए को इन अवैध प्लॉटिंग व निर्माण की जानकारी है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। वहीं अगर जानकारी नहीं है, तो यह प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ सकती हैं समस्याएं
विशेषज्ञों का मानना है कि बिना मानकों के विकसित हो रही कॉलोनियां भविष्य में शहर की बड़ी समस्या बन सकती हैं। अवैध प्लॉटिंग से न सिर्फ यातायात और जल निकासी की समस्या बढ़ेगी, बल्कि बिजली, सीवर और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और वीडीए से मांग की है कि अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ अभियान चलाकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि लोगों को भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।




