Varanasi

शहीद स्मारक पर 101 फीट तिरंगा लगाने की मांग, विधायक त्रिभुवन राम ने लिया संज्ञान

चोलापुर शहीद स्मारक और थाने का किया निरीक्षण, ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण को लेकर ली जानकारी

विवेक राय, वाराणसी

चोलापुर। अजगरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक त्रिभुवन राम ने चोलापुर थाने और शहीद स्मारक का निरीक्षण किया। इस दौरान किसान नेता अजीत सिंह डोभी भी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान शहीद स्मारक परिसर में 101 फीट ऊंचा तिरंगा लगाने और अन्य सुविधाएं विकसित किए जाने की मांग को लेकर चर्चा हुई।

किसान नेता अजीत सिंह डोभी ने बताया कि वाराणसी जिले का इकलौता शहीद स्मारक चोलापुर में स्थित है। उन्होंने शहीदों के सम्मान और स्मारक को विशेष पहचान दिलाने के उद्देश्य से परिसर में 101 फीट ऊंचा तिरंगा लगाए जाने की मांग विधायक के सामने रखी थी। इसी मांग के संबंध में विधायक त्रिभुवन राम ने मौके पर पहुंचकर शहीद स्मारक का निरीक्षण किया।

शहीद स्मारक को बेहतर पहचान दिलाने की पहल

निरीक्षण के दौरान शहीद स्मारक परिसर की स्थिति और वहां उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली गई। 101 फीट ऊंचे तिरंगे की मांग को लेकर विधायक के निरीक्षण से क्षेत्रवासियों में उम्मीद जगी है कि चोलापुर स्थित इस ऐतिहासिक स्मारक को बेहतर स्वरूप और उचित पहचान मिल सकेगी।

चोलापुर थाने के ऐतिहासिक स्थलों का भी निरीक्षण

विधायक त्रिभुवन राम ने चोलापुर थाने के अंदर स्थित ऐतिहासिक स्थलों का भी निरीक्षण किया। बताया गया कि अंग्रेजी शासन के दौरान थाने में हुई गोलीबारी की घटना में पांच जवान शहीद हुए थे। विधायक ने उस स्थान का जायजा लिया, जहां गोलीबारी की घटना हुई थी।

इसके अलावा उन्होंने थाने परिसर में मौजूद अंग्रेजी शासनकाल के पुराने कुएं का भी निरीक्षण किया। किसान नेता अजीत सिंह डोभी ने इस दौरान उस दौर से जुड़ी जानकारी विधायक को दी और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।

ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण पर जोर

निरीक्षण के दौरान शहीदों की स्मृतियों से जुड़े स्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर भी चर्चा हुई। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि चोलापुर के इन ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित कर नई पीढ़ी को उनके इतिहास और बलिदान से परिचित कराया जा सकता है।

विधायक के निरीक्षण के बाद अब क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि 101 फीट ऊंचे तिरंगे के साथ शहीद स्मारक के विकास और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण की दिशा में ठोस पहल होगी।

आजादी से पहले चोलापुर में तिरंगे के लिए शहीद हुए थे पांच वीर सेनानी

17 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अंग्रेजों ने चोलापुर थाने पर तिरंगा फहराने पहुंचे निहत्थे क्रांतिकारियों पर चलाई थीं गोलियां

देश की आजादी के इतिहास में वाराणसी के चोलापुर की धरती भी वीरों के बलिदान की गवाह रही है। 17 अगस्त 1942 को स्वतंत्रता सेनानी चोलापुर थाने पर तिरंगा फहराने पहुंचे। बताया जाता है कि अंग्रेजी पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन निहत्थे सेनानी अपने कदम पीछे हटाने को तैयार नहीं हुए। राष्ट्रीय ध्वज फहराने की कोशिश के दौरान अंग्रेजों ने गोलियां चला दीं। गोलीबारी में पांच वीर सेनानियों ने देश की आजादी और तिरंगे की आन-बान-शान के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इन अमर शहीदों में रामनरेश उपाध्याय उर्फ विद्यार्थी, पंचम, श्रीराम उर्फ बच्चू, चौथी और निरहू शामिल थे।

यह घटना महात्मा गांधी के नेतृत्व में चलाए जा रहे भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान हुई थी। उस दौर में देशभर में अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन तेज हो चुका था। चोलापुर में भी स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देते हुए थाने पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का संकल्प लिया था।

चोलापुर की यह वीरगाथा आज भी लोगों को देशभक्ति, साहस और बलिदान की प्रेरणा देती है।

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