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पहड़िया मंडी में स्टिंग ऑपरेशन से खुली ‘अवैध वसूली’ की पोल, सचिव कार्यालय के सामने ही चल रहा खेल

हर गाड़ी से ₹50–₹100 की वसूली, “मांगते हैं लेकिन जबरदस्ती नहीं करते, जो दे देता है, ले लेते हैं” – कर्मचारी का बेहयाई भरा बयान

आरिफ़ अंसारी, वाराणसी

 

~ लालबहादुर शास्त्री नवीन मंडी में स्टिंग ऑपरेशन से खुली ‘अवैध वसूली’ की पोल

~ सचिव कार्यालय के सामने ही चल रहा खेल, तो क्या वह भी हैं हिस्सेदार…

~ हर गाड़ी से ₹50–₹100 की वसूली, “मांगते हैं लेकिन जबरदस्ती नहीं करते, जो दे देता है, ले लेते हैं” – कर्मचारी का बेहयाई भरा बयान

 

 

वाराणसी: लालबहादुर शास्त्री नवीन मंडी (पहाड़ियां मंडी) में अवैध वसूली का बड़ा मामला सामने आया है। खबर भारत न्यूज़ की टीम द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन में यह खुलासा हुआ कि मंडी में प्रवेश करने वाली गाड़ियों से नियमों के विपरीत खुलेआम ₹50 से ₹100 तक की वसूली की जा रही है, जबकि आधिकारिक तौर पर वजन (टोल) के नाम पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए।

 

स्टिंग के दौरान टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड किया। वीडियो में साफ देखा गया कि मंडी में आने वाली गाड़ियों का वजन किया जाता है और उसकी रसीद भी काटी जाती है, लेकिन इसके साथ ही ड्राइवरों से नकद पैसे भी लिए जा रहे हैं। टीम ने खुद ट्रक ड्राइवर को पैसे देते हुए अपने कैमरे में रिकॉर्ड किया।

जब एक ट्रक ड्राइवर से बात की गई तो उसने साफ तौर पर बताया कि उसने मंडी में प्रवेश के लिए ₹50 दिए हैं। वहीं जब रसीद काटने वाले कर्मचारी अरविंद से इस बारे में सवाल किया गया तो उसने कहा, “हम लोग पैसा तो मानते हैं लेकिन किसी से जबरदस्ती नहीं करते हैं, लेकिन जो अपनी मर्जी से दे देता है, उसे ले लेते हैं।” यह बयान खुद इस बात की पुष्टि करता है कि मंडी में अवैध वसूली को एक सामान्य प्रक्रिया बना दिया गया है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जहां यह पूरा खेल चल रहा है, उसके ठीक पीछे मंडी सचिव का कार्यालय स्थित है। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या अधिकारियों को इस भ्रष्टाचार की जानकारी नहीं है, या फिर वे जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं।

मंडी परिसर में इस तरह की अवैध वसूली न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करती है। अगर सचिव कार्यालय के नजदीक ही इस तरह का खेल खुलेआम चल रहा है, तो यह संकेत देता है कि या तो निगरानी पूरी तरह फेल है या फिर भ्रष्टाचार को संरक्षण प्राप्त है।

अब देखना होगा कि इस स्टिंग ऑपरेशन के सामने आने के बाद संबंधित अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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