वाराणसी में आदिवासी कांग्रेस का प्रदर्शन, ‘आदिवासी विरोधी विचारधारा’ का फूंका पुतला
“हम बनवासी नहीं, आदिवासी हैं” के नारों के साथ जताया विरोध, भाजपा-RSS पर पहचान मिटाने का आरोप

चंदन सिंह, चन्दौली
वाराणसी, 29 मई 2026। आल इंडिया आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया एवं आदिवासी कांग्रेस उत्तर प्रदेश अध्यक्ष डॉ. उमेश चन्द्र के आह्वान पर शुक्रवार को वाराणसी में आदिवासी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने “आदिवासी विरोधी विचारधारा” के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रतीकात्मक पुतला दहन कर अपनी नाराजगी जताई और आदिवासी समाज की पहचान, अधिकार एवं संस्कृति की रक्षा का संकल्प दोहराया।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने “हम बनवासी नहीं, आदिवासी हैं” और “भारत देश के मूलनिवासी हैं” जैसे नारे लगाए। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज अपनी पहचान, अस्तित्व और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष कर रहा है।
भाजपा और आरएसएस पर पहचान मिटाने का आरोप
आदिवासी कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस आदिवासी समुदाय को “बनवासी” कहकर उनकी ऐतिहासिक पहचान को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना था कि “बनवासी” शब्द आदिवासियों को केवल जंगलों तक सीमित करने की मानसिकता को दर्शाता है, जबकि “आदिवासी” शब्द उनके मूलनिवासी होने की ऐतिहासिक और संवैधानिक पहचान को स्थापित करता है।
नेताओं ने कहा कि संविधान सभा के सदस्य एवं प्रसिद्ध आदिवासी नेता जयपाल सिंह मुंडा ने भी संविधान निर्माण के दौरान “बनवासी” शब्द का विरोध किया था और “आदिवासी” शब्द के प्रयोग पर जोर दिया था। उनका मानना था कि यही शब्द आदिवासी समुदाय के पारंपरिक अधिकारों और इतिहास को सही रूप में अभिव्यक्त करता है।
जंगल और जमीन कॉरपोरेट को सौंपने का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि एक ओर मंचों पर आदिवासी संस्कृति और नृत्य को प्रदर्शित कर सम्मान देने का दिखावा किया जाता है, वहीं दूसरी ओर देश के कई वन क्षेत्रों और प्राकृतिक संसाधनों को कॉरपोरेट घरानों के हवाले किया जा रहा है।
नेताओं ने हसदेव अरण्य, केन-बेतवा लिंक परियोजना, सिंगरौली, सिजिमाली, अरावली और अंडमान-निकोबार जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन इलाकों में जंगलों और आदिवासी संसाधनों पर लगातार खतरा बढ़ रहा है। उनका आरोप था कि इससे आदिवासी समुदाय की आजीविका, संस्कृति और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ रहा है।
“न जंगल कटने देंगे, न आदिवासियों को बंटने देंगे”
प्रदर्शन के दौरान आदिवासी कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि आदिवासी समाज अपनी पहचान, इतिहास और संस्कृति को बदलने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “हम बिरसा मुंडा के संघर्ष और जयपाल सिंह मुंडा के विचारों के वारिस हैं। न जंगल कटने देंगे, न आदिवासियों को बंटने देंगे।”
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी कांग्रेस कार्यकर्ता एवं सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग मौजूद रहे।




