Varanasi: लल्लापुरा में खुलेआम सट्टे का खेल, पुलिस से शिकायतों के बाद भी कार्रवाई न होने से उठ रहे सवाल
रांगे वाली ताजिया के पीछे मैदान में सट्टा संचालन का आरोप, 'रानू' व कैफ़ी नाम के व्यक्ति पर संचालन का दावा; मुस्लिम स्कूल के पास गांजा-हेरोइन बिक्री की भी शिकायत—स्थानीय चौकी पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

वाराणसी। पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी में अवैध कारोबार पर कार्रवाई के लिए विशेष अभियान और SOG-2 जैसी व्यवस्था के बावजूद सिगरा थाना क्षेत्र के लल्लापुरा इलाके से कथित सट्टा और मादक पदार्थों के कारोबार की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों और मिली शिकायतों के अनुसार *रांगे वाली ताजिया के पीछे स्थित मैदान में खुलेआम सट्टे का खेल चल रहा है।* आरोप है कि इस गतिविधि का संचालन ‘रानू’ नाम का व्यक्ति कर रहा है।
SOG-2 का गठन ही अवैध कारोबार पर कार्रवाई के लिए हुआ
पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने अवैध गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए SOG-2 को जुआ, सट्टा, अवैध हुक्काबार और मादक पदार्थों की बिक्री जैसी गतिविधियों पर निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी दी थी।
हाल ही में 16 सितंबर 2026 को सिगरा थाना क्षेत्र के रथयात्रा इलाके में SOG-2 और सिगरा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक बड़े जुआ अड्डे का खुलासा हुआ था। पुलिस ने 47 लोगों को गिरफ्तार किया और कुल 21.11 लाख रुपये से अधिक नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई थी।
यानी सिगरा क्षेत्र में बड़े स्तर पर जुए के अड्डे के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। ऐसे में सवाल यह है कि अगर लल्लापुरा में भी लगातार सट्टे की शिकायतें मिल रही हैं तो स्थानीय स्तर पर इसकी जांच और कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
लल्लापुरा में किसके संरक्षण में चल रहा सट्टा?
स्थानीय स्तर से मिली जानकारी के मुताबिक रांगे वाली ताजिया के पीछे मैदान में सट्टा खेलने के लिए लोगों का जमावड़ा होता है। आरोप है कि रानू नाम का व्यक्ति इसका संचालन करता है।
इसके अलावा यह भी दावा किया जा रहा है कि इस कथित सट्टा कारोबार के पीछे कई अन्य लोगों की भूमिका है। सूत्रों के हवाले से एक कथित ‘आका’ और उसके नेटवर्क की चर्चा भी सामने आ रही है। हालांकि इन लोगों की पहचान और भूमिका की पुष्टि जल्द ही किय्या जायेगा।
‘फ़र्जी पत्रकार’ की भूमिका की भी चर्चा
स्थानीय सूत्रों के हवाले से यह आरोप भी सामने आया है कि सिगरा थाना क्षेत्र में सट्टे के कारोबार से जुड़ा एक *कथित पत्रकार* इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड हो सकता है। यह गंभीर आरोप है और इसकी पुष्टि पुलिस जांच या ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही होनी चाहिए।
ऐसे में पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल सिर्फ सट्टा चलने का नहीं, बल्कि यदि इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क या प्रभावशाली व्यक्ति है तो उसकी पहचान कर कार्रवाई करने का है।
मुस्लिम स्कूल के पास मादक पदार्थों की बिक्री का भी आरोप
लल्लापुरा इलाके में मुस्लिम स्कूल के आसपास गांजा और कथित तौर पर हेरोइन की बिक्री होने की शिकायत भी सामने आई है। यदि यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला और गंभीर हो जाता है, क्योंकि मादक पदार्थों की बिक्री का सीधा असर युवाओं और स्थानीय आबादी पर पड़ता है।
पुलिस के सामने अब चुनौती यह है कि केवल छोटे स्तर के विक्रेताओं पर कार्रवाई के बजाय पूरे नेटवर्क, सप्लायर और संरक्षण देने वालों तक कैसे पहुंचा जाए।
चौकी पुलिस को शिकायतों की जानकारी है या नहीं?
सबसे बड़ा सवाल स्थानीय पुलिस चौकी की निगरानी व्यवस्था को लेकर है। आरोप है कि इलाके में कथित सट्टे को लेकर कई बार शिकायतें होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
यदि शिकायतें पुलिस तक पहुंची हैं तो क्या इसकी जांच कराया गया?
क्या सादे कपड़ों में निगरानी या रेकी की गई?
क्या CCTV और स्थानीय इनपुट खंगाले गए?
और यदि सट्टा चलने की पुष्टि हुई है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
इन सवालों का जवाब स्थानीय पुलिस और उच्च अधिकारियों को देना होगा।
SOG-2 ने पहले भी दिखाया है कि कार्रवाई संभव है
सिगरा के रथयात्रा में हाल की कार्रवाई इसका उदाहरण है। SOG-2 ने कई दिनों की रेकी के बाद बंद मकान में चल रहे जुए के अड्डे पर छापा मारकर 47 लोगों को पकड़ा था।
ऐसे में लल्लापुरा के आरोपों पर भी उच्चस्तरीय निगरानी या SOG-2 से जांच कराई जाए तो कथित जुआ, लॉटरी, सट्टा और मादक पदार्थों के नेटवर्क की वास्तविकता सामने आ सकती है।




