मंदिर पर ताला लगाने को लेकर साधु और ग्रामीण महिलाएं आमने-सामने, पूजा-पाठ बाधित
महिलाओं ने साधुओं पर पूजा में रोक-टोक और अव्यवस्था का लगाया आरोप, साधुओं ने आरोपों को बताया निराधार; शिवपुर थाना प्रभारी ने मौके पर पहुंचकर संभाला मामला

वाराणसी। शिवपुर थाना क्षेत्र के परमानंदपुर गांव स्थित एक मंदिर में व्यवस्था और मंदिर परिसर में साधुओं के रहने को लेकर विवाद गहरा गया। सोमवार सुबह मंदिर के मुख्य द्वार पर ग्रामीण महिलाओं द्वारा ताला लगाए जाने के बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। मंदिर पर ताला लगने से पूजा-अर्चना और भगवान के भोग की व्यवस्था बाधित होने की बात सामने आई।
विवाद की सूचना पर शिवपुर थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों की बात सुनी। थाना प्रभारी ने मामले को समझाते हुए फिलहाल स्थिति को शांत कराया। पुलिस की ओर से जांच पूरी होने तक मंदिर परिसर से साधु को चले जाने की बात कही गई। हालांकि साधु पक्ष का कहना है कि जब तक उन्हें अखाड़े की ओर से कोई आदेश नहीं मिलता, तब तक वे मंदिर परिसर नहीं छोड़ेंगे। फिलहाल संबंधित साधु मंदिर के बाहर बनी एक कुटिया में रह रहे हैं।
महिलाओं ने साधुओं पर पूजा-पाठ में रोकने का लगाया आरोप
गांव की निवासी रिंका समेत अन्य ग्रामीण महिलाओं का आरोप है कि मंदिर में रहने वाले साधु उन्हें नियमित रूप से पूजा-पाठ करने में रोकते हैं। महिलाओं का कहना है कि उन्हें मंदिर में दीया-बाती जलाने, अगरबत्ती और कपूर चढ़ाने तक से रोका जाता है और कई बार मंदिर परिसर से बाहर जाने के लिए कहा गया।
महिलाओं ने मंदिर परिसर में साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि पिछले करीब एक वर्ष से वे साधुओं के व्यवहार और मंदिर की कथित अव्यवस्था को लेकर परेशान हैं। महिलाओं के मुताबिक, कई बार स्थिति सुधारने के लिए कहा गया, लेकिन जब कोई समाधान नहीं निकला तो सोमवार सुबह उन्होंने मंदिर के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया।
ग्रामीण महिलाओं की मांग है कि बाहर से आए साधुओं को मंदिर परिसर से हटाया जाए और मंदिर की पूजा-पाठ एवं देखरेख की जिम्मेदारी गांव के लोगों को दी जाए।
साधुओं ने आरोपों को बताया निराधार
वहीं, दूसरी ओर पंचदशनाम जूना अखाड़ा से जुड़े महंत स्वामी शशिकांत आनंद गिरि और महंत राम नारायण गिरि ने महिलाओं के आरोपों को निराधार बताया है।
साधु पक्ष का कहना है कि वे अखाड़े के निर्देश पर मंदिर में रहकर भगवान की सेवा और पूजा-अर्चना कर रहे हैं। उनका कहना है कि मंदिर या उसकी संपत्ति पर उनका कोई व्यक्तिगत अधिकार नहीं है और वे केवल धार्मिक सेवा के उद्देश्य से वहां रह रहे हैं।
महंत स्वामी शशिकांत आनंद गिरि के मुताबिक, सोमवार सुबह कुछ महिलाएं मंदिर परिसर में पहुंचीं और वहां शोर-गुल किया। इसके बाद उन्हें बाहर निकालकर मंदिर के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया गया। साधुओं का कहना है कि मंदिर बंद होने से भगवान को नियमित भोग लगाने और पूजा-अर्चना करने में परेशानी हो रही है।
साधुओं ने महिलाओं द्वारा लगाए गए आरोपों के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करने की बात भी कही है।
राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में किसके नाम है जमीन?
विवाद के बीच राजस्व विभाग की ओर से बताया गया है कि संबंधित जमीन के रिकॉर्ड में यह भूमि ‘मंदिर लाल बहादुर शास्त्री शिक्षा संस्थान’ के नाम से दर्ज है। ऐसे में मंदिर परिसर के स्वामित्व, प्रबंधन और वहां साधुओं के रहने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।
यही वजह है कि अब प्रशासनिक स्तर पर राजस्व अभिलेखों और मंदिर की व्यवस्था से जुड़े तथ्यों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
थाना प्रभारी ने दोनों पक्षों को समझाकर कराया शांत
विवाद की जानकारी मिलने पर शिवपुर थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों की बात सुनी। थाना प्रभारी ने मामले को समझा-बुझाकर फिलहाल शांत कराया।
पुलिस की ओर से जांच पूरी होने तक संबंधित बाबा को वहां से चले जाने की बात कही गई। हालांकि साधु पक्ष का कहना है कि उन्हें अखाड़े की ओर से जब तक कोई आदेश नहीं मिलता, तब तक वे मंदिर परिसर नहीं छोड़ेंगे।
फिलहाल साधु मंदिर परिसर के बाहर बनी एक कुटिया में रह रहे हैं।
अभी तक थाने में लिखित शिकायत नहीं
मामले में दोनों पक्षों के अनुसार अभी तक थाने में कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है। हालांकि पुलिस को मौखिक रूप से विवाद की सूचना दिए जाने की बात सामने आई है।
फिलहाल पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कराया है और मामले में जांच की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है। मंदिर की जमीन से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड, पूजा-पाठ की व्यवस्था और साधुओं के वहां रहने के अधिकार से जुड़े पहलुओं की जांच के बाद ही विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाकर मंदिर में पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों को सुचारु रूप से दोबारा शुरू कराने के साथ-साथ मंदिर की व्यवस्था और भूमि से जुड़े विवाद का स्थायी समाधान किस तरह करता है।



