BHU में विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन का आगाज, सीएम योगी ने भारतीय ज्ञान परंपरा और विज्ञान के समन्वय पर दिया जोर
विदेशी और वामपंथी विचारधाराओं पर साधा निशाना, बोले- भारत की वैज्ञानिक विरासत को कमजोर करने की हुई कोशिश; 1200 से अधिक वैज्ञानिक और विशेषज्ञ हुए शामिल

धनेश्वर साहनी, वाराणसी
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के स्वतंत्रता भवन में शनिवार को विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन का भव्य शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय इस राष्ट्रीय आयोजन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। कार्यक्रम में देश-विदेश से आए वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। अधिवेशन का मुख्य विषय भारतीय ज्ञान परंपरा, विज्ञान, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में वैज्ञानिक सोच की भूमिका रहा।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लंबे समय तक देश में यह भ्रम फैलाया गया कि भारतीय प्रतिभा और ज्ञान किसी भी क्षेत्र में विदेशी देशों के मुकाबले कमतर है। उन्होंने कहा कि विदेशी शक्तियों, वामपंथी विचारधारा और भारत-विरोधी तत्वों ने सुनियोजित तरीके से भारत की सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक विरासत को कमजोर करने का प्रयास किया, लेकिन आज भारत अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय के बल पर वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की वैज्ञानिक परंपरा हजारों वर्षों पुरानी है। हमारे ऋषि-मुनियों और विद्वानों ने गणित, खगोल विज्ञान, चिकित्सा, कृषि और अन्य अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान-विज्ञान की विरासत से जोड़ा जाए और अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जाए।
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है और कई क्षेत्रों में खेती की उत्पादकता घट रही है। ऐसे समय में प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देना जरूरी है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कृषि की गुणवत्ता भी बेहतर हो सके।
गंगा नदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने बचपन की एक स्मृति भी साझा की। उन्होंने बताया कि उनकी माता उन्हें घर के पास छोटी-छोटी क्यारियों में पौधों की देखभाल करने के लिए प्रेरित करती थीं। जब पौधों में कीड़े लग जाते थे या उनमें फूल नहीं आते थे, तब उनकी माता गंगाजल का छिड़काव करती थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ ही दिनों में पौधे फिर से स्वस्थ हो जाते थे और उनमें फूल खिलने लगते थे। इसी अनुभव ने उन्हें गंगा की महत्ता और भारतीय परंपराओं के वैज्ञानिक पहलुओं को समझने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम के दौरान BHU के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत और सम्मान किया। इस अवसर पर विज्ञान भारती के पदाधिकारियों सहित देशभर से आए वैज्ञानिक समुदाय के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
विज्ञान भारती का सातवां राष्ट्रीय अधिवेशन 13 और 14 जून को आयोजित किया जा रहा है, जिसमें लगभग 1200 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इनमें वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, नीति-निर्माता और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं। दो दिवसीय इस अधिवेशन में विज्ञान, नवाचार, भारतीय ज्ञान परंपरा, तकनीकी विकास और आत्मनिर्भर भारत से जुड़े विभिन्न विषयों पर मंथन किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार यह अधिवेशन विज्ञान और समाज के बीच संवाद को मजबूत करने, भारतीय ज्ञान परंपरा को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पुनर्स्थापित करने तथा देश को अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।




