ख़बर भारत विशेष: काशी में वट सावित्री व्रत की धूम, अखंड सौभाग्य के लिए सुहागिनों ने रखा निर्जला उपवास
अस्सी से दुर्गाकुंड तक वट वृक्षों के नीचे लगीं कतारें, सोलह श्रृंगार कर महिलाओं ने की यमराज से पति के दीर्घायु की कामना, गूंजी सत्यवान-सावित्री की कथा

रिपोर्ट: वीरेंद्र पटेल।
वाराणसी। जेठ मास की अमावस्या के पावन अवसर पर आज धर्मनगरी काशी सहित पूरे देश में वट सावित्री व्रत पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ कड़ा निर्जला व्रत रखा है। सुबह से ही शहर के विभिन्न इलाकों में स्थित वट वृक्षों (बरगद) के नीचे पूजन-अर्चन के लिए महिलाओं का हुजूम उमड़ पड़ा।
त्रिदेवों के वास ‘अक्षय वट’ की परिक्रमा, बाधाओं पर भारी पड़ा आस्था का उत्साह
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वट वृक्ष (बरगद) की जड़ में सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा, तने में जगत के पालनहार भगवान विष्णु और शाखाओं व पत्तियों में देवों के देव महादेव का वास होता है। इसी अटूट विश्वास के साथ सोलह श्रृंगार कर पूजा की थाली सजाए महिलाएं सुबह से ही कचहरी, दुर्गाकुंड, संकटमोचन, अस्सी और लंका स्थित वट वृक्षों के पास जुटने लगीं।
भीषण गर्मी और चढ़ते पारे के बावजूद महिलाओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। महिलाओं ने अक्षय वट को जल अर्पित कर, रोली-चंदन का तिलक लगाया और कच्चे सूत के धागे से वृक्ष की 7 या 108 बार परिक्रमा कर उसे रक्षा सूत्र में बांधा।
यमराज पर भारी पड़ा पतिव्रत धर्म: गूंजी पौराणिक कथा
पूजन के दौरान घाटों और मंदिरों के प्रांगण में पुरोहितों द्वारा सत्यवान-सावित्री की पौराणिक कथा का वाचन किया गया, जिसे महिलाओं ने अत्यंत श्रद्धा भाव से सुना।
व्रत का महत्व: पौराणिक काल में पतिव्रता सावित्री ने अपने तपोबल और अडिग पतिव्रत धर्म के कारण साक्षात मृत्यु के देवता यमराज को भी झुकने पर मजबूर कर दिया था और अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस ले आई थीं। तभी से यह व्रत सुहागिनों के लिए पति की रक्षा और दीर्घायु का अचूक कवच माना जाता है।
सामूहिक भजनों से भक्तिमय हुआ माहौल, लिया बड़ों का आशीर्वाद
इस अवसर पर शहर में कई जगह सामूहिक कथा और मंगल गीतों का आयोजन भी किया गया, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। पूजा की मुख्य रस्मों को संपन्न करने के बाद महिलाओं ने भीगे चने, पूरी और गुड़ का बायना निकालकर घर के बड़े-बुजुर्गों के पैर छुए और उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया गया। सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए पुलिस प्रशासन भी मुस्तैद नजर आया।




