ट्रामा सेंटर में रेबीज़ इंजेक्शन को लेकर लापरवाही, मरीजों को सुबह आने की सलाह
पंडित दीनदयाल अस्पताल के ट्रामा सेंटर में रात में इलाज से इनकार का आरोप, कुत्ते के काटने वाले मरीजों को झेलनी पड़ रही परेशानी

आरिफ़ अंसारी, वाराणसी
- ट्रॉमा सेंटर में रेबीज़ इंजेक्शन को लेकर लापरवाही के आरोप
- रात में पहुंचे मरीजों को सुबह आने की दी जा रही सलाह
- कुत्ते के काटने के मामलों में तत्काल इलाज जरूरी, फिर भी देरी
- परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए
- स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता पर खड़े हुए सवाल
- जिम्मेदारों की ओर से अब तक कोई स्पष्ट बयान नहीं
वाराणसी। पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल (डीडीयू) के ट्रामा सेंटर में रेबीज़ के इंजेक्शन को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मरीजों को तत्काल इंजेक्शन लगाने के बजाय उन्हें सुबह आने की सलाह दे रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, जब किसी पशु काटने के पीड़ित को रात में ट्रामा सेंटर लाया जाता है, तो उसे यह कहकर लौटा दिया जाता है कि यह इमरजेंसी नहीं है और इंजेक्शन सुबह ही लगाया जाएगा। इससे मरीजों और परिजनों में आक्रोश है, क्योंकि रेबीज़ जैसी गंभीर बीमारी में समय पर वैक्सीनेशन बेहद जरूरी होता है।
इस मामले में अस्पताल के सीएमएस आर एस राम का कहना है कि एक वायल में चार डोज होती हैं, इसलिए सभी मरीजों के एकत्र होने पर ही इंजेक्शन लगाया जाता है। उनका तर्क है कि रात में भी वैक्सीन उपलब्ध है, लेकिन व्यावहारिक रूप से मरीजों की संख्या के आधार पर ही इंजेक्शन लगाया जाना संभव हो पाता है।
हालांकि, दूसरी ओर कबीरचौरा अस्पताल में देर रात ही मरीज को रेबीज़ का इंजेक्शन लगाए जाने की बात सामने आई है, जिससे डीडीयू अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रामा सेंटर जैसे आपातकालीन विभाग में इस तरह की व्यवस्था मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मामले में जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।




