डिप्टी सीएम का करीबी होने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी, दो प्रॉपर्टी डीलरों को कोर्ट से अग्रिम जमानत
बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत में पक्ष रखा, शर्तों के साथ मिली जमानत

अजय त्रिपाठी, वाराणसी
वाराणसी। डिप्टी सीएम का करीबी होने का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये की कथित धोखाधड़ी करने के मामले में आरोपित दो प्रॉपर्टी डीलरों को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अपर जिला जज (षष्ठम) आलोक कुमार की अदालत ने चंदौली के शेरूका निवासी मृत्युंजय सिंह तथा बड़ागांव के धरमपुर निवासी शिवकुमार को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है। अदालत ने आदेश दिया कि यदि पुलिस दोनों आरोपितों को गिरफ्तार करती है तो एक-एक लाख रुपये की दो-दो जमानतें एवं बंधपत्र प्रस्तुत करने पर उन्हें रिहा किया जाएगा। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत में मजबूती से पक्ष रखा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी चन्द्रशेखर राजभर ने बड़ागांव थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि 5 मार्च 2023 को बाबतपुर क्षेत्र में उनकी मुलाकात मृत्युंजय सिंह और शिवकुमार से हुई थी। दोनों आरोपितों ने खुद को अनुभवी रियल एस्टेट कारोबारी बताया और जेबीएस प्रॉपर्टी प्राइवेट लिमिटेड तथा शक्ति कैपिटल नामक कंपनियों का संचालक होने का दावा किया। साथ ही उन्होंने खुद को प्रदेश के डिप्टी सीएम का करीबी बताकर वादी का विश्वास जीतने की कोशिश की। आरोपितों ने बाबतपुर क्षेत्र में जमीन उपलब्ध कराने और निवेश करने पर अच्छा मुनाफा देने का भरोसा दिलाया।
शिकायत के मुताबिक, आरोपितों के इस झांसे में आकर चन्द्रशेखर राजभर ने 15 अप्रैल 2023 से 31 अगस्त 2023 के बीच शक्ति कैपिटल के खाते में चेक के माध्यम से कुल 7 लाख रुपये जमा किए। इसके अलावा उन्होंने अपने कुछ रिश्तेदारों को भी इन कंपनियों में निवेश करने के लिए प्रेरित किया। आरोप है कि रकम लेने के बावजूद आरोपितों ने न तो कोई जमीन उपलब्ध कराई और न ही निवेश की गई धनराशि वापस की। शुरुआती दो-तीन महीनों तक कुछ भुगतान या किस्तें दी गईं, लेकिन बाद में सभी किस्तें बंद कर दी गईं। जब वादी और उनके रिश्तेदारों ने रुपये वापस मांगे तो आरोपितों ने साफ इनकार कर दिया। न केवल भुगतान से मना किया गया बल्कि शिकायतकर्ता को गाली-गलौज भी की गई और जान से मारने की धमकी तक दे दी गई।
एफआईआर में यह भी उल्लेख किया गया है कि दोनों आरोपी अलग-अलग शहरों में कंपनियों के नाम बदल-बदलकर जमीन दिलाने के नाम पर लोगों से धन जुटाने का काम करते रहे हैं। वे झूठे आश्वासन देकर आम लोगों से धोखाधड़ी करने में लगे हुए हैं। इसी शिकायत के आधार पर बड़ागांव पुलिस ने दोनों आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
हालांकि, मामले की विस्तृत सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों आरोपितों की अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया। अदालत ने गिरफ्तारी की स्थिति में निर्धारित शर्तों के साथ उन्हें अग्रिम जमानत का लाभ देने का आदेश जारी किया है। फिलहाल मामले की जांच पुलिस द्वारा जारी है और आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। इस घटना ने एक बार फिर रियल एस्टेट क्षेत्र में प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा उच्च पदाधिकारियों का नाम लेकर की जाने वाली ठगी की प्रवृत्ति को उजागर किया है।




