वाराणसी में अवैध ‘यूनियन’ के नाम पर खेल! वसूली, फर्जी पत्रकार और बिना परमिट गाड़ियों का खुलासा
नीरज सिंह, वाराणसी

~ कार्रवाई शुरू होते ही बौखलाए ‘नेटवर्क’ के लोग
~ हर महीने 2000 रुपये की वसूली का आरोप
~ वीडियो बनाकर अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश
वाराणसी में इन दिनों ऑटो संचालन को लेकर एक गंभीर और जटिल मामला सामने आ रहा है। आरोप है कि ऑटो यूनियन की आड़ में अवैध वसूली, बिना परमिट गाड़ियों का संचालन और “पत्रकार” की पहचान का दुरुपयोग खुलेआम किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ लोग ड्राइवरों से हर महीने करीब 2000 रुपये वसूल कर बिना परमिट गाड़ियां चलवा रहे हैं। इतना ही नहीं, वीडियो बनाकर अधिकारियों पर दबाव बनाने की रणनीति भी अपनाई जा रही है।
जब यातायात विभाग के निरीक्षक अनुराग त्यागी और उनकी टीम ने अभियान के तहत ऐसे मामलों पर कार्रवाई शुरू की, तो इस पूरे नेटवर्क में हलचल मच गई। बिना परमिट गाड़ियों पर कार्रवाई करना विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके खिलाफ माहौल बनाने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं।
चौंकाने वाली बात यह भी है कि जिस व्यक्ति के लिए यह पूरा खेल खेला जा रहा है, वह पहले ऑटो चोरी के मामले में जेल जा चुका है। बावजूद इसके, अब “पत्रकार” का नाम लेकर दबाव बनाने और अवैध गतिविधियों को जारी रखने की कोशिश हो रही है।
कुछ दिन पहले कैंट स्टेशन पर प्रयागराज रूट की गाड़ियों को निशाना बनाया गया था, और अब अवैध वसूली के साथ एक नई “यूनियन” खड़ी कर दी गई है।
सवाल यही है—
क्या यूनियन के नाम पर यह वसूली और कानून से खिलवाड़ सही है?
क्या “पत्रकारिता” की आड़ में ऐसे काम पूरे पेशे की साख पर सवाल नहीं उठाते?




