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CM Bihar के मीडिया एकाउंट से जमुई की नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने के आरोप, राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की उठी मांग

युवा फाउंडेशन ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सोशल मीडिया पोस्ट की निष्पक्ष जांच और POCSO के तहत कार्रवाई की मांग

श्रुति, संवाददाता

 

 

 

वाराणसी। बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ हुई कथित छेड़छाड़ और उत्पीड़न की घटना के बाद अब पीड़िता की पहचान सार्वजनिक होने के आरोप को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। इसी मामले में वाराणसी की युवा फाउंडेशन की अध्यक्ष सीमा चौधरी ने भारत की राष्ट्रपति को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण में तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि जमुई की नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार की पहचान सामने आने वाली तस्वीर को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया गया और बाद में पोस्ट हटा दी गई। इस मामले को लेकर विपक्षी नेताओं की ओर से भी सवाल उठाए गए हैं।

POCSO की धारा 23 का दिया हवाला

युवा फाउंडेशन ने अपने पत्र में POCSO अधिनियम की धारा 23 का हवाला देते हुए कहा है कि नाबालिग पीड़ित की पहचान उजागर करने वाली जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए।

कानून के मुताबिक, किसी बच्चे की पहचान उसके नाम, पते, फोटो, परिवार, स्कूल, पड़ोस अथवा किसी अन्य ऐसे विवरण से उजागर नहीं की जा सकती, जिससे उसकी पहचान सामने आ सके। विशेष परिस्थिति में भी पहचान उजागर करने की अनुमति संबंधित विशेष अदालत द्वारा बच्चे के हित में कारण दर्ज करते हुए दी जा सकती है। धारा 23 के उल्लंघन पर छह महीने से एक वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

ज्ञापन में इसी कानूनी प्रावधान के आधार पर मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट की जांच कराने और यह निर्धारित करने की मांग की गई है कि क्या उस पोस्ट से नाबालिग की पहचान सार्वजनिक हुई थी और यदि हुई तो उसके लिए कानूनी जिम्मेदारी तय की जाए।

“पोस्ट हटाने से मामला खत्म नहीं होता”

ज्ञापन में कहा गया है कि मुख्यमंत्री की ओर से तस्वीर पोस्ट किए जाने के बाद उसे हटा दिया गया, लेकिन तब तक उसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर सामने आ चुका था। विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने भी इसी पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए मुख्यमंत्री पर POCSO के प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

हालांकि, पोस्ट से कानून का उल्लंघन हुआ या नहीं, यह सक्षम जांच एजेंसी और न्यायिक प्रक्रिया का विषय है। ऐसे में इस मामले में निष्पक्ष जांच के जरिए तथ्यों को स्पष्ट किए जाने की मांग उठाई गई है।

सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी कार्रवाई की मांग

ज्ञापन में उन सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है, जिन पर नाबालिग पीड़िता की पहचान सामने लाने वाली सामग्री प्रसारित करने का आरोप है।

जमुई मामले में पुलिस पहले ही ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर चुकी है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने नाबालिग की पहचान उजागर करने वाले वायरल वीडियो को प्रसारित करने वाले बड़ी संख्या में सोशल मीडिया प्रोफाइल के खिलाफ कार्रवाई की है; एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 120 प्रोफाइल के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

युवा फाउंडेशन ने मांग की है कि ऐसी सामग्री को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से तत्काल हटवाया जाए और जिन लोगों ने जानबूझकर पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने वाली सामग्री प्रसारित की है, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो।

स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग

ज्ञापन में पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग भी की गई है। पत्र में कहा गया है कि नाबालिग पीड़िता की निजता और गरिमा की रक्षा करना किसी भी जांच और प्रशासनिक कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।

साथ ही यह मांग रखी गई है कि भविष्य में किसी भी लोकसेवक, मंत्री या संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की ओर से नाबालिग पीड़ित की पहचान से संबंधित संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक न हो और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर पद की परवाह किए बिना कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

अपर मजिस्ट्रेट कार्यालय में सौंपा गया ज्ञापन

युवा फाउंडेशन की अध्यक्ष सीमा चौधरी की ओर से राष्ट्रपति के नाम यह ज्ञापन अपर मजिस्ट्रेट डॉ. राजेश कुमार के कार्यालय में प्रमोद जी द्वारा रिसीव किया गया।

ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से आग्रह किया गया है कि वह इस मामले में संबंधित संवैधानिक एवं कानूनी संस्थाओं से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराने के लिए संज्ञान लें।

जमुई मामले में पहले से चल रही है पुलिस कार्रवाई

गौरतलब है कि 19 सितंबर को जमुई में एक नाबालिग छात्रा और उसके नाबालिग साथी को रास्ते में रोककर कथित तौर पर मारपीट और छेड़छाड़ की गई थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू की। मामले में SIT गठित किए जाने और आरोपियों की गिरफ्तारी की भी रिपोर्ट सामने आई है।

अब इस पूरे प्रकरण में पीड़िता की पहचान की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों ने मामले को एक नया आयाम दे दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित जांच एजेंसियां मुख्यमंत्री की सोशल मीडिया पोस्ट और पहचान उजागर करने वाली अन्य सामग्री को लेकर क्या कानूनी रुख अपनाती हैं।

हेडलाइन के कुछ और विकल्प:

  • जमुई पीड़िता की पहचान उजागर होने पर राष्ट्रपति से शिकायत, मुख्यमंत्री के खिलाफ जांच की मांग
  • POCSO के उल्लंघन का आरोप, जमुई की नाबालिग पीड़िता को लेकर राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग
  • ‘नाबालिग की पहचान सार्वजनिक कैसे हुई?’ राष्ट्रपति को भेजा गया ज्ञापन, कार्रवाई की मांग
  • जमुई कांड में नया विवाद: पीड़िता की पहचान उजागर करने के आरोप पर राष्ट्रपति से शिकायत

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