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मुगलसराय में अवैध गांजा बिक्री जोरो पर; चन्दौली पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

प्रदीप जायसवाल के इशारे पर गांजा बिक्री का दावा, क्राइम ब्रांच के एक सिपाही की भूमिका पर भी सवाल-आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग

ख़बर भारत, डेस्क 

 

 

~ मुगलसराय में अवैध गांजा बिक्री जोरो पर

~ प्रदीप जायसवाल नामक व्यक्ति के इशारे पर बिक रहा गांजा

~ पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

~ क्राइम ब्रांच के सिपाही की भूमिका पर भी सवाल

 

चंदौली जिले के मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र से अवैध गांजे की बिक्री और शराब तस्करी को लेकर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के मुताबिक, क्षेत्र की कुछ भांग की दुकानों पर कथित तौर पर गांजे की बिक्री हो रही है, वहीं शराब की अवैध तस्करी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां चल रही हैं, तो जिम्मेदार विभागों की निगरानी आखिर कहां है? क्या इन गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई हो रही है, या फिर अवैध कारोबार करने वालों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं?

भांग की दुकानों पर गांजे की बिक्री का आरोप

मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र की कुछ भांग की दुकानों पर गांजे की बिक्री होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी दावा किया जा रहा है कि इस अवैध कारोबार का दायरा लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित दुकानों की जांच किया जाना आवश्यक है।

प्रदीप जायसवाल को लेकर भी उठे सवाल

आरोपों में प्रदीप जायसवाल नाम के एक व्यक्ति का भी उल्लेख किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि वह कथित तौर पर गांजे की बिक्री से प्राप्त रकम इकट्ठा कर मुगलसराय कोतवाली तक पहुंचाता है। यह बेहद गंभीर आरोप है, जिसकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। इस संबंध में किसी भी व्यक्ति की भूमिका को जांच और आधिकारिक पुष्टि के बिना दोषी नहीं माना जा सकता।

क्राइम ब्रांच के सिपाही की भूमिका पर भी सवाल

इस पूरे मामले में चंदौली क्राइम ब्रांच के एक सिपाही की कथित भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि संबंधित सिपाही की मुगलसराय कोतवाली के अधिकारियों से नजदीकी है और वह कोतवाली में कारखासी का काम भी देख रहा है।

यदि इन आरोपों में कोई सच्चाई है, तो यह पुलिस की निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय होगा। ऐसे में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जरूरत है।

चंधासी से बिहार तक शराब पहुंचने का दावा

वहीं, मुगलसराय क्षेत्र के चंधासी स्थित अंग्रेजी शराब की दुकान से कथित तौर पर बिहार की ओर शराब भेजे जाने के आरोप भी सामने आ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि ऑटो के माध्यम से शराब की खेप बिहार की तरफ ले जाई जाती है।

इन आरोपों में क्राइम ब्रांच के एक सिपाही की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, शराब की कथित तस्करी, इसमें शामिल लोगों और किसी भी प्रकार के आर्थिक लेन-देन की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।

एसपी की सख्ती के बावजूद उठ रहे सवाल

गौरतलब है कि शराब से जुड़े मामले में चंदौली के पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल द्वारा पूर्व में एक इंस्पेक्टर को निलंबित किए जाने की बात भी सामने आई थी। ऐसे में अब सवाल उठता है कि क्या मुगलसराय क्षेत्र में लगाए जा रहे नए आरोपों पर भी पुलिस प्रशासन गंभीरता से संज्ञान लेगा?

यदि अवैध गांजे की बिक्री और शराब तस्करी के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, यदि किसी पुलिसकर्मी की संलिप्तता सामने आती है, तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

अब निगाहें पुलिस अधीक्षक के अगले कदम पर

मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र में कथित अवैध कारोबार को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब सबकी निगाहें चंदौली पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं। क्या इन आरोपों की जांच के लिए कोई विशेष टीम गठित होगी? क्या संबंधित दुकानों की जांच की जाएगी? और क्या कथित शराब तस्करी के नेटवर्क की सच्चाई सामने आएगी?

इन सवालों के जवाब पुलिस जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होंगे।

फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर अवैध कारोबार की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच कब होगी और जिम्मेदार पाए जाने वालों पर कार्रवाई कब होगी?

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