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सावधान! सिगरा का मशहूर ‘राजू का छोला-कुलचा’ बना बीमारी का खतरा; गंदगी के बीच तैयार हो रहा खाना, खाद्य विभाग बेखबर?

वाराणसी। खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ दुकानों की जांच और कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क किनारे ठेलों से लेकर रेस्टोरेंट तक बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्वच्छता, सुरक्षित भंडारण और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

इसके बावजूद सिगरा कमांड सेंटर के बगल मुख्य मार्ग पर वर्षों से संचालित एक चर्चित राजू का ‘छोला-कुलचा चावल’ के ठेले पर खुलेआम स्वच्छता मानकों की अनदेखी का मामला सामने आया है। यहां दिनभर ग्राहकों की भीड़ रहती है, लेकिन खाना बनाने और परोसने के तरीके को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि खाद्य विभाग की नियमित निगरानी और कार्रवाई के अभाव में ठेला संचालक बेखौफ होकर अनहाइजीनिक तरीके से खाद्य पदार्थ बेच रहा है। दुकानदार राजू ने बताया कि नगर निगम, स्थानीय पुलिस से लेकर खाद्य विभाग सब  ‘सिस्टम’ में है, सालों से ऐसे अनहाइजीनिक तरीके से संचालन की कई शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूर होनी चाहिए।

 

 

सड़क किनारे अतिक्रमण कर सालों से चल रहा कारोबार

सिगरा का यह इलाका बेहद व्यस्त माना जाता है। कमांड सेंटर के आसपास बड़ी संख्या में निजी कार्यालय होने के कारण दोपहर के समय यहां लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। इसी मुख्य मार्ग के किनारे ठेला लगाकर छोला-कुलचा और छोला-चावल बेचा जाता है।

ग्राहकों की भीड़ के कारण ठेले के आसपास सड़क पर भी लोगों और वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या संबंधित नगर निगम या स्थानीय प्रशासन की अनुमति से यहां यह कारोबार संचालित हो रहा है? यदि सड़क और सार्वजनिक स्थान का अतिक्रमण हो रहा है तो जिम्मेदार विभाग इसकी जांच क्यों नहीं करता?

जमीन पर पड़ा खाद्य पदार्थ, आसपास मंडराती मक्खियां

सामने आए वीडियो में ठेले के आसपास स्वच्छता की स्थिति चिंताजनक दिखाई देती है। आरोप है कि खाने-पीने की सामग्री को व्यवस्थित और स्वच्छ तरीके से रखने के बजाय कई चीजें जमीन के पास रखी जाती हैं।

वीडियो में जमीन पर पड़ा हुआ मक्खन दिखाई देता है, जिसके आसपास मक्खियां मंडराती नजर आती हैं। यदि खाद्य सामग्री वास्तव में इस तरह खुले में पड़ी है तो उसके सीधे संपर्क में आने वाली धूल, गंदगी और मक्खियों से खाद्य पदार्थ दूषित होने की आशंका बनी रहती है।

 

सिगरा जैसे व्यस्ततम इलाके में सालों से सड़क किनारे अतिक्रमण, कमांड सेंटर के बगल में चल रहे इस दुकान पर कार्रवाई क्यों नहीं?

 

घंटों पहले काटकर रखे जाते हैं प्याज

ठेले पर ग्राहकों को परोसे जाने वाले खाने के साथ प्याज का भी इस्तेमाल होता है, जिसे एक ही पानी मे बार-बार धोया जाता है। आरोप है कि प्याज को काफी पहले काटकर खुले में लंबे समय तक रखा जाता है।

गर्मी और खुले वातावरण में कटे हुए खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक असुरक्षित तरीके से रखने पर उनके दूषित होने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण और ढककर रखने की व्यवस्था पर भी सवाल उठता है।

प्लास्टिक के डिब्बों में गर्म छोला रखने का आरोप

ठेले पर छोला बड़े बर्तन में गर्म किया जाता है, जबकि तैयार छोले को नीचे जमीन पर रखे प्लास्टिक के डिब्बों में स्टोर किए जाने का आरोप है। बताया जा रहा है कि घर से तैयार करके लाया गया छोला इन डिब्बों में रखा जाता है और एक कंटेनर खत्म होने के बाद दूसरे कंटेनर में छोला डाल दिया जाता है।

यह व्यवस्था खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से जांच का विषय है। खासकर गर्म खाद्य पदार्थों को किस प्रकार के कंटेनर में, कितनी देर और किन परिस्थितियों में रखा जा रहा है, इसकी जांच संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को करनी चाहिए।

एक ही पानी में बार-बार धोए जाते हैं बर्तन, बढ़ जाता है बीमारी का खतरा

यदि ऐसा हो रहा है तो साफ-सफाई की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा होता है। गंदे बर्तनों और दूषित पानी के जरिए संक्रमण फैलने की आशंका रहती है। ऐसे में दस्त, उल्टी और अन्य जलजनित या खाद्यजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बर्तन धोने के लिए स्वच्छ पानी और उचित सफाई व्यवस्था होना बेहद जरूरी है।

एक ही गंदे पानी में बार-बार जूठे बर्तन धोने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे बर्तनों के इस्तेमाल से डायरिया, पेचिश, फूड पॉइजनिंग और हेपेटाइटिस-A/E जैसी बीमारियों का जोखिम हो सकता है। ऐसे में खाद्य विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि वह बर्तन धोने और स्वच्छ पानी के इस्तेमाल की व्यवस्था की जांच करे।”

घरेलू गैस सिलेंडर के व्यावसायिक इस्तेमाल का आरोप

ठेले पर खाना पकाने के लिए गैस सिलेंडर का इस्तेमाल किया जाता है। आरोप है कि व्यावसायिक उपयोग के लिए निर्धारित कमर्शियल सिलेंडर की जगह घरेलू गैस सिलेंडर का इस्तेमाल किया जा रहा है।

यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो यह संबंधित विभागों के लिए कार्रवाई का विषय होगा। प्रशासन को मौके पर इस्तेमाल हो रहे गैस सिलेंडर की जांच करनी चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि खाद्य कारोबार में इस्तेमाल होने वाला ईंधन नियमों के अनुरूप है या नहीं।

खाना बनाने वाला ही सफाई से बेपरवाह?

ठेले पर खाना बनाने और ग्राहकों को परोसने के दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता का भी सवाल उठ रहा है। आरोप है कि खाना बनाने वाला व्यक्ति साफ-सफाई और हाइजीन का पर्याप्त ध्यान नहीं रखता।

सड़क किनारे खुले वातावरण में खाना तैयार होने के कारण धूल, धुआं, मक्खियां और आसपास की गंदगी खाद्य पदार्थों के संपर्क में आ सकती है। ऐसे में भोजन को ढककर रखना, साफ बर्तन इस्तेमाल करना और खाना बनाने वाले व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वच्छता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

भीड़ खूब, लेकिन खाद्य सुरक्षा की जांच कहां?

यह ठेला लंबे समय से संचालित बताया जा रहा है और दिनभर ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है। आसपास के कार्यालयों में काम करने वाले बड़ी संख्या में लोग दोपहर के समय यहां भोजन करने पहुंचते हैं। यानी रोजाना बड़ी संख्या में लोग यहां तैयार भोजन का सेवन करते हैं।

ऐसे में सवाल और गंभीर हो जाता है कि क्या खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने कभी इस ठेले का निरीक्षण किया? यदि निरीक्षण किया गया तो क्या कमियां मिलीं और उन पर क्या कार्रवाई हुई? यदि कोई निरीक्षण नहीं हुआ तो इतने व्यस्त स्थान पर वर्षों से संचालित खाद्य कारोबार विभाग की नजर से कैसे बचा रहा?

 

 

दुकानदार के कथित बयान ने खड़े किए और बड़े सवाल

स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर जब एक दुकानदार ने ठेले पर गंदगी और खाद्य पदार्थों की स्थिति पर सवाल किया तो कथित तौर पर ठेला संचालक राजू ने खाद्य विभाग में ‘सेटिंग’ होने की बात कही। आरोप है कि उसने यह दावा किया कि विभाग के लोग महीने का पैसा लेकर चले जाते हैं और इसलिए उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

दुकानदार राजू द्वारा दिये गए ऐसे बयान अपने आप में जांच का विषय है। खाद्य विभाग को चाहिए कि वह इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करे कि क्या कभी इस ठेले का निरीक्षण हुआ, कोई नमूना लिया गया या कोई कार्रवाई की गई।

खाद्य विभाग से बड़ा सवाल—निगरानी हो रही है या आंखें बंद हैं?

सवाल सिर्फ एक ठेले की गंदगी का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था का है जिसके तहत खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होता है कि जनता को सुरक्षित और स्वच्छ भोजन मिले।

यदि सड़क किनारे खुले में इस तरह खाद्य पदार्थ बेचे जा रहे हैं, जमीन के पास सामग्री रखी जा रही है, बर्तनों की सफाई संदिग्ध तरीके से हो रही है और गैस सिलेंडर के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल हैं, तो क्या संबंधित विभाग को इसकी जानकारी नहीं है?

और यदि जानकारी है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

वहीं, ‘महीना’ लेकर कार्रवाई नहीं करने का आरोप यदि गलत है तो खाद्य विभाग को जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि इसमें कोई सच्चाई सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और ठेला संचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

ग्राहकों की सेहत से खिलवाड़ की शिकायत पर हो जांच

फिलहाल पूरे मामले में सबसे जरूरी है कि संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, पानी की स्वच्छता, बर्तनों की सफाई, खाद्य सामग्री के भंडारण, गैस सिलेंडर, ठेले की स्वच्छता और आवश्यक लाइसेंस/पंजीकरण की जांच करे।

क्योंकि यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग खाना खाते हैं। यदि खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हो रहा है तो यह केवल दुकानदार की लापरवाही नहीं, बल्कि ग्राहकों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला है। अब देखना होगा कि शिकायत और सामने आए वीडियो के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करता है या फिर यह ठेला इसी तरह खुलेआम चलता रहता है।

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