कोर्ट के आदेश पर VDA के JE समेत 7 पर FIR: नक्शा पास कराने के नाम पर ₹5 लाख मांगने, मारपीट और रिश्वतखोरी के आरोप
SC/ST कोर्ट के आदेश पर शिवपुर थाने में मुकदमा दर्ज, रिश्वत मांगने, मारपीट, जातिसूचक टिप्पणी और धमकी के गंभीर आरोप
आरिफ़ अंसारी, वाराणसी
पीड़ित का आरोप—पहले नक्शा पास कराने के नाम पर लिए गए रुपये, फिर अतिरिक्त रकम की मांग; घर पहुंचकर मारपीट और धमकी देने का भी आरोप
वाराणसी। वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ रिश्वत मांगने, मारपीट, धमकी और जातिसूचक टिप्पणी के आरोप में मुकदमा दर्ज होने का मामला सामने आया है। विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी) की अदालत के आदेश के बाद शिवपुर थाने में तत्कालीन अवर अभियंता (JE) जयप्रकाश गुप्ता, कर्मचारी सुशील उपाध्याय, अनिरुद्ध पांडेय, सूरज यादव समेत तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
मामला शिवपुर थाना क्षेत्र के भगतपुर का बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता सुजीत सोनकर के अनुसार, उनकी मां लालमणी देवी के नाम पर भगतपुर में भूखंड है, जिस पर निर्माण कराया जा रहा था। आरोप है कि 8 दिसंबर 2025 को VDA की ओर से निर्माण स्थल पर नोटिस चस्पा किया गया। इसके बाद सुजीत नक्शा पास कराने की प्रक्रिया के लिए VDA कार्यालय पहुंचे।
नक्शा पास कराने के नाम पर रुपये लेने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उस समय तत्कालीन JE जयप्रकाश गुप्ता ने उन्हें अपने कर्मचारी सुशील उपाध्याय से मिलने के लिए कहा। सुजीत के मुताबिक, सुशील ने कथित तौर पर 3 से 3.50 लाख रुपये में नक्शा पास कराने की बात कही और 30 हजार रुपये एडवांस के तौर पर ले लिए।
इसके बाद 11 फरवरी को उन्हें करीब 8.13 लाख रुपये जमा करने की जानकारी दी गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उन्होंने 12 फरवरी को 50 हजार रुपये जमा किए और बाकी रकम के लिए समय मांगा।
अतिरिक्त ₹5 लाख मांगने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि निर्धारित शुल्क से अधिक रकम की मांग पर आपत्ति जताने के बाद उन्हें नए JE के आने की बात कही गई। आरोप है कि नए JE की ओर से भी निर्धारित शुल्क के अलावा तत्काल पांच लाख रुपये देने का दबाव बनाया गया।
सुजीत का दावा है कि रकम नहीं देने पर मकान सील करने की धमकी दी गई। इसके बाद विवाद बढ़ गया और मामला थाने से लेकर अदालत तक पहुंचा।
घर पहुंचकर मारपीट और जातिसूचक टिप्पणी का आरोप
शिकायत के मुताबिक, 17 मार्च की शाम कुछ लोग कथित तौर पर सुजीत के घर पहुंचे। आरोप है कि उनसे पांच लाख रुपये की मांग की गई। रुपये देने से इनकार करने पर गाली-गलौज और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया। शिकायतकर्ता ने मारपीट और घर में तोड़फोड़ का भी आरोप लगाया है।
सुजीत के अनुसार, आरोपियों ने उनकी जेब से करीब आठ हजार रुपये भी निकाल लिए। शोर सुनकर उनके चचेरे भाई शिवमंगल सोनकर, भतीजे राहुल सोनकर और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और बीच-बचाव किया।
धमकी देकर चले जाने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि मौके से जाते समय आरोपियों ने पांच लाख रुपये नहीं देने पर फर्जी मुकदमे में फंसाने और जेल भेजने की धमकी दी। इसके बाद उन्होंने मामले को लेकर पुलिस से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर विशेष न्यायालय (एससी/एसटी) का दरवाजा खटखटाया।
अदालत के आदेश के बाद शिवपुर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। FIR में नामजद आरोपियों के अलावा तीन अज्ञात लोगों को भी शामिल किया गया है।
अब पुलिस जांच में सामने आएगा सच
मामले में फिलहाल शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर मुकदमा दर्ज हुआ है। आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि नक्शा पास कराने के नाम पर वास्तव में किसी तरह की अवैध रकम की मांग या लेनदेन हुआ था या नहीं। साथ ही कथित मारपीट, धमकी और जातिसूचक टिप्पणी के आरोपों की भी जांच की जाएगी।
इस मामले में VDA के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है। जांच में दस्तावेज, भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड, शिकायतों, मौके पर मौजूद लोगों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को आधार बनाया जा सकता है।
अदालत के आदेश के बाद दर्ज हुए इस मुकदमे ने VDA की कार्यप्रणाली और निर्माण संबंधी मामलों में शिकायतों के निस्तारण को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। अब पुलिस जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और इस मामले में किन लोगों की भूमिका सामने आती है।




