एक ही मंदिर में दो महिलाओं के गहने कटे, एक FIR चार दिन बाद, दूसरी अब भी इंतजार में! शिवपुर पुलिस की कार्रवाई पर क्यों न उठे सवाल

वीरेन्द्र पटेल, वाराणसी
वाराणसी। शिवपुर थाना क्षेत्र के गिलट बाजार स्थित संत अतुलानंद स्कूल के पास एक ही शिव मंदिर में हरितालिका तीज के दिन महिलाओं के गहने चोरी होने के दो मामलों ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि दोनों घटनाएं एक ही दिन, एक ही मंदिर और पूजा के दौरान होने की बात सामने आई है, लेकिन दोनों मामलों में मुकदमा दर्ज करने को लेकर अलग-अलग स्थिति बताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, 14 सितंबर 2026 की शाम हरितालिका तीज के अवसर पर पूजा के दौरान अर्चना सिंह के गले से करीब 40 ग्राम वजन का सोने का मंगलसूत्र चोरी होने का आरोप है। इसकी कीमत करीब छह लाख रुपये बताई गई है। पीड़िता के पति अमितेश सिंह के अनुसार, घटना की जानकारी उसी दिन शिवपुर थाने को दी गई और लिखित प्रार्थना पत्र भी दिया गया।
लेकिन पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, इस मामले में मुकदमा 18 सितंबर की रात करीब 11:06 बजे दर्ज किया गया। यानी घटना की सूचना दिए जाने के करीब चार दिन बाद FIR दर्ज होने का दावा है। यही देरी अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।
दूसरी महिला की शिकायत पर अब तक मुकदमा नहीं?
इसी मंदिर में दूसरी घटना रंजू सिंह के साथ होने का दावा किया गया है। उनके मुताबिक, पूजा के दौरान उनके गले से करीब 15 ग्राम की सोने की चेन लॉकेट समेत चोरी हो गई। रंजू सिंह का कहना है कि उन्होंने भी घटना को लेकर पुलिस को लिखित प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन अब तक FIR दर्ज नहीं की गई।
यहीं से सवाल और गंभीर हो जाता है—एक ही मंदिर, एक ही दिन और लगभग एक जैसे आरोपों के बावजूद दोनों शिकायतों पर कार्रवाई अलग क्यों?
एक पीड़ित परिवार के मुताबिक जहां पहली घटना में मुकदमा चार दिन बाद दर्ज हुआ, वहीं दूसरी पीड़िता अभी भी FIR का इंतजार कर रही है। क्या शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया हर पीड़ित के मामले में अलग-अलग तय होती है? क्या मामला दर्ज करने से पहले पुलिस स्तर पर कोई अलग सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जा रही है? और अगर ऐसा है, तो उसकी स्पष्ट जानकारी पीड़ितों को क्यों नहीं दी जा रही?
पर्व के दिन मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
मामला सिर्फ FIR में देरी तक सीमित नहीं है। हरितालिका तीज जैसे पर्व पर मंदिरों में बड़ी संख्या में महिलाएं पूजा के लिए पहुंचती हैं। ऐसे में भीड़भाड़ वाले स्थान पर महिलाओं के गले से सोने के आभूषण चोरी होने की शिकायत सामने आना मंदिर की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है।
अगर दोनों घटनाएं पूजा के दौरान हुईं, तो क्या मंदिर परिसर में पर्याप्त पुलिस निगरानी थी? क्या वहां सीसीटीवी कैमरे लगे हैं? अगर लगे हैं, तो घटना के समय की फुटेज की जांच की गई या नहीं? क्या पुलिस ने संदिग्ध लोगों की पहचान के लिए फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को खंगाला?
पुलिस की कार्रवाई पर उठता सबसे बड़ा सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पीड़ित परिवार घटना के तुरंत बाद पुलिस के पास पहुंच रहे हैं, तो एक शिकायत पर मुकदमा दर्ज होने में चार दिन क्यों लगते हैं और दूसरी शिकायत अभी तक लंबित क्यों है?
पीड़ितों की मानें तो उन्हें कार्रवाई के लिए थाने के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ऐसे में पुलिस की त्वरित कार्रवाई और शिकायतों के निष्पक्ष निस्तारण को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, इन आरोपों पर शिवपुर पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
अब पुलिस के सामने सिर्फ FIR दर्ज करने का सवाल नहीं, बल्कि दोनों घटनाओं की एक साथ जांच, सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल, संदिग्धों की पहचान और चोरी गए आभूषणों की बरामदगी की चुनौती भी है।
एक ही मंदिर में एक ही दिन महिलाओं के गहने चोरी होने की शिकायतें और दोनों मामलों में अलग-अलग कार्रवाई की स्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या शिवपुर पुलिस दोनों शिकायतों को समान गंभीरता से लेकर निष्पक्ष जांच करेगी, या कार्रवाई के इस अंतर को लेकर उठ रहे सवाल यूं ही बने रहेंगे? अब निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर हैं।




