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कचहरी चौकी इंचार्ज पर शराब के नशे में अभद्रता का आरोप, डॉक्टर और बैंक मैनेजर को दी ‘मां-बहन’ की गालियाँ

कैंट थाना क्षेत्र के कचहरी चौराहे की घटना; नशे में चौकी प्रभारी ने दी गालियाँ, लोगों ने किया विरोध, कही मेडिकल करने की बात तो मौके से गाड़ी लेकर भागे चौकी प्रभारी घनश्याम निषाद

आरिफ़ अंसारी, वाराणसी

 

 

वाराणसी। उत्तर प्रदेश की मित्र पुलिस को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले व्यस्त कचहरी चौराहे पर तैनात चौकी प्रभारी घनश्याम निषाद पर शराब के नशे में धुत होकर आम नागरिकों, एक डॉक्टर और बैंक मैनेजर के साथ सरेआम गाली-गलौज और बदतमीजी करने का गंभीर आरोप लगा है। इस घटना के बाद से स्थानीय जनता और प्रबुद्ध वर्ग में भारी आक्रोश व्याप्त है।

 

 

चाय की दुकान पर खड़े लोगों से शुरू हुई बदसलूकी

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मामला कचहरी चौराहे का है जहां रविवार को सामान्य तरह कुछ लोग रात में सड़क किनारे एक दुकान पर चाय पी रहे थे। इसी दौरान वहां कचहरी चौकी प्रभारी घनश्याम निषाद पहुंचे। चौराहे के किनारे एक कार खड़ी थी, जिसमें डॉक्टर प्रशांत सिंह (Joint Secratary, IDA) और चंदन तिवारी (बैंक मैनेजर, SBI) अपने साथियों के साथ बैठे थे। आरोप है कि चौकी प्रभारी ने वहां पहुंचते ही बिना किसी वजह के कार सवार डॉक्टर और बैंक मैनेजर को ‘मां-बहन’ की भद्दी-भद्दी गालियां देना शुरू कर दिया।

जनता ने जताया विरोध, तो चौकी पर ले जाने की दी धमकी

पुलिसकर्मी के इस अमर्यादित व्यवहार को देखकर वहां मौजूद लोगों ने तुरंत इस पर आपत्ति जताई और चौकी प्रभारी से कहा:

“अगर गाड़ी गलत जगह पर खड़ी है, तो आप नियम के अनुसार इसका चालान कर दीजिए। लेकिन इस तरह सार्वजनिक रूप से मां-बहन की गंदी-गंदी गालियां देना आपको शोभा नहीं देता।”

Dr. Prashant Singh, Joint Secretary, IDA, Varanasi

इस पर अपनी गलती सुधारने के बजाय चौकी प्रभारी और आक्रोशित हो गए और विरोध करने वाले लोगों को धौंस दिखाते हुए वीडियोग्राफी करते हुए चौकी पर आने की धमकी देने लगे।

‘नशे’ की बात खुलते ही मौके से खिसके दरोगा जी

जब मौके पर मौजूद लोगों ने कड़ा रुख अख्तियार किया और साफ शब्दों में कहा कि “आप दारू के नशे में धुत हैं और यहां आकर सरेआम पुलिस विभाग की छवि खराब कर रहे हैं,” तब दरोगा जी के होश ठिकाने आए। जनता के तीखे तेवरों और खुद को घिरता देख चौकी इंचार्ज घनश्याम निषाद तुरंत अपनी गाड़ी स्टार्ट कर वहां से रफूचक्कर हो गए।

“पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल की मेहनत पर पानी फेर रहे ऐसे लोग”

पीड़ित बैंक मैनेजर चंदन तिवारी और डॉक्टर प्रशांत सिंह ने इस घटना को बेहद अपमानजनक और मानसिक रूप से आहत करने वाला बताया है। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा:

“एक तरफ वाराणसी के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल लगातार पुलिसिंग को सुधारने और जनता के बीच पुलिस की छवि को ‘मित्र पुलिस’ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।”

“वहीं दूसरी तरफ, घनश्याम निषाद जैसे पुलिसकर्मी शराब के नशे में सार्वजनिक स्थानों पर अभद्रता कर खाकी को दागदार कर रहे हैं।”

पीड़ितों की मांग है कि ऐसे विकृत मानसिकता वाले अधिकारियों को पब्लिक डीलिंग (जनता से सीधे जुड़ाव) वाले पदों पर बिल्कुल भी तैनात नहीं किया जाना चाहिए।

अधिवक्ताओं, पत्रकारों और फरियादियों से बदतमीजी का पुराना है इतिहास-

स्थानीय लोगों और कचहरी से जुड़े सूत्रों का आरोप है कि मौजूदा चौकी प्रभारी का व्यवहार शुरू से ही निहायत ही बदतमीज किस्म का रहा है।

वकीलों और पत्रकारों से विवाद: यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी आए दिन इनके द्वारा वकीलों और मीडियाकर्मियों से बदतमीजी की खबरें आती रही हैं।

फरियादियों से दुर्व्यवहार: चौकी पर अपनी शिकायत लेकर आने वाले गरीब और बेबस फरियादियों से भी यह सीधे मुंह बात नहीं करते।

“दम हो तो मेरा ट्रांसफर करवा दो” – चौकी इंचार्ज का अड़ियल रवैया

चौकी प्रभारी की कार्यशैली से परेशान लोगों का कहना है कि दरोगा जी अक्सर यह धौंस देते फिरते हैं कि उन्हें इस चौकी पर रहने का कोई शौक नहीं है। वह अक्सर लोगों से कहते हैं कि “जिसको ज्यादा तकलीफ हो, वह मेरा यहां से ट्रांसफर करवा दे, यहां रहना भी कौन चाहता है।”

ऐसे में अब वाराणसी पुलिस महकमे और जनता के बीच यह बड़ा सवाल तैर रहा है कि क्या चौकी प्रभारी अपनी नौकरी और तैनाती अपनी मर्जी से तय करेंगे या फिर पुलिस कमिश्नर के आदेशों और अनुशासन से चलेंगे?

अब देखना यह है कि इस मामले की शिकायत आला अधिकारियों तक पहुंचने के बाद, खाकी को सरेआम बदनाम करने वाले इस चौकी इंचार्ज पर क्या कार्रवाई की जाती है।

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