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Varanasi: बीएचयू एमसीएच विंग में गर्भवती महिला को ब्लड न होने पर भर्ती से इनकार, परिजन परेशान

नीरज सिंह, वाराणसी

 

वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आईएमएस) के एमसीएच (मैटरनिटी एंड चाइल्ड हेल्थ) विंग में देर रात एक गर्भवती महिला को ब्लड उपलब्ध न होने के कारण भर्ती न किए जाने का मामला सामने आया है। महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है और डॉक्टरों ने सिजेरियन डिलीवरी की सलाह दी थी। इस घटना से परिजनों में आक्रोश है और उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

घटना का विवरण

परिजनों के अनुसार, महिला को गंभीर एनीमिया (खून की कमी) की शिकायत थी। डॉक्टरों ने साफ तौर पर कहा था कि सामान्य प्रसव संभव नहीं है और सिजेरियन ऑपरेशन से डिलीवरी करानी होगी। इसके लिए ब्लड की व्यवस्था जरूरी थी।

देर रात महिला को लेकर परिजन अस्पताल पहुंचे, लेकिन एमसीएच विंग के स्टाफ ने ब्लड यूनिट उपलब्ध न होने का हवाला देकर भर्ती करने से मना कर दिया। परिजनों का कहना है कि उन्होंने बार-बार अनुरोध किया, लेकिन प्रशासन ने अपनी बात पर अड़े रहने का रवैया अपनाया।

परिजनों की परेशानी

भर्ती न होने के बाद परिजन लंबे समय तक अस्पताल परिसर में इधर-उधर भटकते रहे। महिला की हालत बिगड़ती जा रही थी, जिससे पूरा परिवार मानसिक रूप से टूटा हुआ है। एक परिजन ने बताया, “हम दूर से आए हैं। यहां भर्ती होने की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन ब्लड न होने का बहाना देकर मरीज को वापस भेज दिया गया। ऐसी स्थिति में मरीज को कहां ले जाएं?”

बीएचयू अस्पताल की भूमिका और विडंबना

बीएचयू अस्पताल उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल सहित बिहार, मध्य प्रदेश और नेपाल के कई इलाकों के लिए प्रमुख रेफरल सेंटर है। खासकर गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए एमसीएच विंग में विशेष सुविधाएं होने का दावा किया जाता है। फिर भी, ब्लड बैंक की कमी या रात के समय ब्लड की उपलब्धता न होना जैसी समस्याएं बार-बार सामने आती रहती हैं। यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था में मौजूद कमियों को उजागर करती है, जहां दूर-दूर से मरीज आते हैं और आपात स्थिति में भी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पातीं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मत

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर एनीमिया वाली गर्भवती महिलाओं में सिजेरियन के दौरान भारी रक्तस्राव का खतरा रहता है। ऐसे में ब्लड की पहले से व्यवस्था होना अनिवार्य है। अगर अस्पताल में ब्लड नहीं है तो मरीज को दूसरे केंद्र में रेफर करना चाहिए, न कि भर्ती से इनकार कर देना चाहिए।

क्या कहता है अस्पताल प्रशासन?

अभी तक बीएचयू अस्पताल प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। परिजनों ने मामले को उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाने की बात कही है।

सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को इस तरह की घटनाओं पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। ब्लड बैंक को 24×7 मजबूत बनाने, इमरजेंसी में वैकल्पिक व्यवस्था और स्टाफ की संवेदनशीलता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि कोई मरीज बिना इलाज के न लौटे।

यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को दर्शाती है। ऐसी लापरवाही न सिर्फ एक परिवार को प्रभावित करती है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े करती है।

 

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