Varanasi

BHU में अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक सुधार सम्मेलन आज से शुरू, डॉ. मुखर्जी और जेपी के विचारों पर होगा महामंथन

यूनेस्को से मान्यता प्राप्त इस दो दिवसीय आयोजन में देश-विदेश के दिग्गज शिक्षाविद और नीति-निर्माता बदलेंगे भारतीय शिक्षा की दिशा

रिपोर्ट: धनेश्वर साहनी।

 

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में आज से शिक्षा जगत का एक बड़ा महाकुंभ शुरू हो गया है। विश्वविद्यालय के परिसर में 06 और 07 जुलाई, 2026 को “इक्कीसवीं सदी के लिए शैक्षिक सुधार: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं लोकनायक जयप्रकाश नारायण की विरासत के आलोक में शिक्षा की पुनर्कल्पना” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। यह महत्वपूर्ण आयोजन भारत के दो महान राष्ट्रचिंतकों, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी तथा लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 125वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले स्मृति-समारोहों की उद्घाटन कड़ी के रूप में संपन्न हो रहा है। इस सम्मेलन की सबसे खास बात यह है कि इसे यूनेस्को के 2026–2027 द्विवर्षीय “एसोसिएशन विद द सेलिब्रेशन ऑफ एनिवर्सरीज़” कार्यक्रम के अंतर्गत विशेष मान्यता प्राप्त है, जिससे इसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्ता काफी बढ़ जाती है।

इस भव्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन यूनेस्को के साथ सहयोग हेतु भारतीय राष्ट्रीय आयोग (INCCU), शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया जा रहा है। इस वैश्विक मंच को सफल बनाने में शांति एवं अंतरसांस्कृतिक समझ हेतु यूनेस्को चेयर तथा मालवीय शांति अनुसंधान केंद्र, काशी हिंदू विश्वविद्यालय सहयोगी संस्थाओं के रूप में कंधे से कंधा मिलाकर सहभागी बन रहे हैं। आयोजकों का स्पष्ट मानना है कि इस सम्मेलन का उद्देश्य केवल शिक्षा पर पारंपरिक विमर्श तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारतीय शिक्षा व्यवस्था की दिशा, दृष्टि और नैतिक मूल्यों को नए सिरे से परिभाषित करना भी है।

दो दिनों तक चलने वाले इस बौद्धिक मंथन में शिक्षा जगत, नीति-निर्माण, शोध, सामाजिक चिंतन और सांस्कृतिक विमर्श से जुड़े राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विद्वान, शिक्षाविद और विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान इक्कीसवीं सदी की आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार, भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता, समावेशी और मूल्यपरक शिक्षा के साथ-साथ शांति, लोकतांत्रिक चेतना, सामाजिक न्याय तथा अंतरसांस्कृतिक संवाद जैसे बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। सम्मेलन का केंद्रीय भाव यही है कि दोनों महान विचारकों के आदर्शों को वर्तमान शिक्षा व्यवस्था से जोड़कर एक ऐसी संरचना खड़ी की जाए, जो आधुनिक होने के साथ-साथ भारतीयता से भी ओतप्रोत हो।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित यह सम्मेलन शिक्षा, समाज और राष्ट्र के भविष्य को लेकर एक बेहद गंभीर बौद्धिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय प्रशासन को पूरा भरोसा है कि इस सम्मेलन के मंच से निकलने वाले विचार, व्यावहारिक सुझाव और निष्कर्ष आने वाले समय में देश की शैक्षिक नीतियों, अकादमिक विमर्श और सामाजिक चेतना को एक नई और सकारात्मक दिशा प्रदान करेंगे। यह भव्य आयोजन न केवल दो महान राष्ट्रचिंतकों को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करेगा, बल्कि शिक्षा के माध्यम से एक अधिक न्यायपूर्ण और जागरूक समाज के निर्माण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button