Delhi

दिल्ली में विपक्ष पर पुलिसिया एक्शन, राहुल-अखिलेश समेत कई नेता हिरासत में!

NEET विवाद और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन, कई वरिष्ठ नेताओं को पुलिस ने हटाया; यूपी में भी विरोध तेज

ख़बर भारत।

 

नई दिल्ली। NEET परीक्षा विवाद और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को राजधानी दिल्ली का हाई-सिक्योरिटी इलाका उस समय सियासी अखाड़े में बदल गया, जब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता प्रधानमंत्री आवास की ओर कूच कर गए। प्रधानमंत्री आवास के निकट लोक कल्याण मार्ग पर हुए इस प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को हिरासत में ले लिया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन करने का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने प्रदर्शन को सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बताया।

जंतर-मंतर से लोक कल्याण मार्ग तक बढ़ा प्रदर्शन

छात्र संगठनों द्वारा NEET परीक्षा और कथित पेपर लीक को लेकर चल रहे आंदोलन के समर्थन में विपक्षी नेता पहले घायल छात्रों से मिलने पहुंचे। इसके बाद राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसद, कई विपक्षी नेता और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़े। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही तय की जाए, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और पूरे मामले पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाए।

अखिलेश यादव की मौके पर तस्वीर।
राहुल गांधी की पुलिस हिरासत।

 

सरकार ने बातचीत की कोशिश की, लेकिन नहीं बनी सहमति

प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह विपक्षी नेताओं से बातचीत करने पहुंचे। उन्होंने संसद में शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कराने का भरोसा दिलाया, लेकिन विपक्ष ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से पीछे हटने से इनकार कर दिया। बातचीत विफल होने के बाद प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ा दी गई और पुलिस ने प्रदर्शन समाप्त कराने की कार्रवाई शुरू कर दी।

पुलिस ने नेताओं को उठाकर बसों में बैठाया, राहुल गांधी को लगी चोट

स्थिति बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को हटाना शुरू किया। राहुल गांधी को पुलिसकर्मियों ने धरना स्थल से उठाकर पुलिस वाहन तक पहुंचाया। इस दौरान कांग्रेस ने आरोप लगाया कि धक्का-मुक्की में राहुल गांधी के चेहरे पर चोट लगी और उनकी नाक से खून भी निकला। प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव को भी हिरासत में लेकर पुलिस बसों में बैठाया गया। हिरासत के दौरान अखिलेश यादव का पुलिसकर्मियों से “कहां ले जा रहे हो पुलिस भाई?” पूछते हुए वीडियो भी सामने आया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।

किन-किन नेताओं को लिया गया हिरासत में

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव के अलावा कांग्रेस के कई सांसदों और वरिष्ठ नेताओं को भी हिरासत में लिया गया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार सहित अन्य कांग्रेस नेताओं को भी पुलिस ने प्रदर्शन स्थल से हटाया। बाद में सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया।

पूरे उत्तर प्रदेश में विरोध की लहर, लखनऊ से वाराणसी तक प्रदर्शन

दिल्ली में हुई कार्रवाई की खबर फैलते ही उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। लखनऊ, वाराणसी, बस्ती समेत कई शहरों में कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कई स्थानों पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका, जबकि संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। कुछ जगहों पर नेताओं और कार्यकर्ताओं को एहतियातन हिरासत में भी लिया गया।

विपक्ष का आरोप- छात्रों की आवाज दबा रही सरकार

रिहाई के बाद राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की आवाज को बलपूर्वक दबाया नहीं जा सकता और लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराना हर नागरिक का अधिकार है। अखिलेश यादव ने भी कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दे पर आवाज उठाना अपराध नहीं हो सकता। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने स्पष्ट किया कि संसद से लेकर सड़क तक यह आंदोलन जारी रहेगा और सरकार को जवाब देना होगा।

सरकार ने रखा अपना पक्ष

सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास देश का अति-सुरक्षित क्षेत्र है और वहां बिना अनुमति प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी जा सकती। सरकारी पक्ष का दावा है कि संसद में शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए सरकार तैयार थी, लेकिन विपक्ष ने बातचीत के बजाय टकराव का रास्ता चुना।

देश भर में हो रहे इस आंदोलन के राजनीतिक मायने

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छात्रों के आंदोलन के मुद्दे पर विपक्ष एकजुट दिखाई देने की कोशिश कर रहा है। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव की हिरासत ने इस विरोध प्रदर्शन को राष्ट्रीय स्तर का राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। आने वाले दिनों में संसद और सड़कों पर इस मुद्दे को लेकर सियासी टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

 

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