सम्पूर्ण समाधान दिवस में शिकायत का ‘निस्तारण’ कागजों पर, मौके पर समस्या जस की तस!
पेड़ की डालियां खेत में लटके होने की शिकायत, ग्रामीण का आरोप—बिना समस्या दूर किए लगा दी गई निस्तारण रिपोर्ट; अब दोबारा जांच की मांग

विशाल कुमार, संवाददाता, वाराणसी
वाराणसी। सम्पूर्ण समाधान दिवस में ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निस्तारण के लिए शिकायतें दर्ज की जाती हैं। लेकिन चिरईगांव क्षेत्र से सामने आया एक मामला शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया और मौके पर कार्रवाई के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। ग्राम मुड़ली, थाना चौबेपुर, पोस्ट उमरहा, परगना कटहर, तहसील सदर निवासी शम्भू प्रसाद पुत्र मुन्नालाल का आरोप है कि उनकी शिकायत का निस्तारण कागजों पर कर दिया गया, जबकि मौके पर बताई गई समस्या अभी भी बनी हुई है।
शम्भू प्रसाद ने 6 सितंबर 2026 को सम्पूर्ण समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र देकर शिकायत की थी। आवेदन में उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके खेत के पास लगे नीम, आम, कटहल और बांस के पेड़ों की डालियां खेत की ओर लटक रही हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इन डालियों के कारण उनकी करीब दो बिस्वा भूमि पर खेती प्रभावित हो रही है। उन्होंने पेड़ों की डालियां हटवाने और मामले में आवश्यक कार्रवाई की मांग की थी।
शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित स्तर से कार्रवाई की गई और चिरईगांव चौकी पुलिस की ओर से रिपोर्ट लगाकर शिकायत के निस्तारण की बात सामने आई। हालांकि, शिकायतकर्ता का कहना है कि मौके की स्थिति में कोई प्रभावी बदलाव नहीं हुआ है। उनका आरोप है कि पेड़ों की डालियां अब भी खेत की ओर लटकी हुई हैं और जिस समस्या को लेकर उन्होंने शिकायत की थी, वह पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
शिकायतकर्ता के पास मौजूद दस्तावेज में शिकायत का आवेदन क्रमांक 30099626002487 दर्ज है। इसके अलावा उनके मोबाइल पर प्राप्त संदेश में भी शिकायत के निस्तारण की सूचना दिखाई दे रही है। इसी के आधार पर शिकायतकर्ता ने निस्तारण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दोबारा स्थलीय जांच की मांग की है।
निस्तारण रिपोर्ट के बाद भी समस्या मौजूद होने का दावा
मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि यदि शिकायतकर्ता के अनुसार पेड़ की डालियां अब भी खेत में मौजूद हैं, तो शिकायत का निस्तारण किस आधार पर किया गया। क्या निस्तारण से पहले मौके की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया गया था? यदि स्थलीय जांच की गई थी, तो उसमें क्या पाया गया और उसके आधार पर क्या कार्रवाई की गई?
शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि समस्या का वास्तविक समाधान किए बिना ही निस्तारण रिपोर्ट लगा दी गई। हालांकि, इस संबंध में संबंधित पुलिसकर्मियों या प्रशासनिक अधिकारियों का विस्तृत पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
शिकायतकर्ता की संतुष्टि और स्थलीय सत्यापन पर सवाल
सम्पूर्ण समाधान दिवस की शिकायतों में निस्तारण के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होता है कि शिकायतकर्ता द्वारा बताई गई समस्या वास्तव में दूर हुई या नहीं। ऐसे में इस मामले में शिकायतकर्ता की संतुष्टि, मौके के सत्यापन और कार्रवाई की रिपोर्ट को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
यदि मौके पर जांच हुई थी, तो उसकी रिपोर्ट में पेड़ों की डालियों और खेत की स्थिति के बारे में क्या उल्लेख किया गया है? वहीं यदि शिकायतकर्ता की समस्या का समाधान हो चुका है, तो मौके पर की गई कार्रवाई का विवरण भी सामने आना जरूरी है।
शम्भू प्रसाद ने मामले में दोबारा निष्पक्ष स्थलीय जांच कराने और वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक खेत में लटक रही डालियों की समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक शिकायत को पूरी तरह निस्तारित मानना उचित नहीं है।
फिलहाल, इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप और निस्तारण संबंधी दस्तावेज सामने आए हैं। संबंधित पुलिस और तहसील प्रशासन का विस्तृत पक्ष तथा मौके की स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत की दोबारा स्थलीय जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करता है या पहले से दर्ज निस्तारण रिपोर्ट को ही अंतिम मानता है।
यह मामला केवल पेड़ की डालियों से जुड़ी शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि शिकायतों के कागजी निस्तारण और मौके पर वास्तविक समाधान के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल खड़े करता है।




