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बेखौफ बदमाशों ने DIG कॉलोनी के पास फिर की मोबाइल छिनैती, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

आरिफ़ अंसारी, वाराणसी

~ रात में मारपीट कर युवक से छीना मोबाइल

~ वारदात के बाद भी काफी देर तक चालू रहा मोबाइल

~ रात में ही पकड़े जा सकते थे बदमाश लेकिन मोबाइल लोकेशन लेने में असमर्थ दिखी पुलिस

~ बदमाशों का सुराग नहीं लगा सकी पुलिस

~ मौके पर पहुंचे महज दो फैंटम पुलिसकर्मी

~ सुनसान पीएमटी कॉलोनी में मिला नशेड़ियों का अड्डा

~ दो साल पहले भी यहीं से हुई थी छिनौती, कैंट पुलिस ने नहीं दर्ज किया FIR

~ पिछले साल भी छिनौती का शिकार हुए था स्थानीय युवक

~ PnT कॉलिनी के खाली फ्लैट बना अवांछनीय तत्वों का अड्डा, कैन्ट पुलिस बेखबर

 

 

वाराणसी। कैन्ट थाना क्षेत्र का DIG कॉलोनी और मकबूल आलम रोड का इलाका एक बार फिर मोबाइल छिनैती की वारदात को लेकर चर्चा में है। बुधवार की रात करीब एक बजे शिवपुर निवासी चांद नामक युवक के साथ बदमाशों ने मारपीट कर उसका मोबाइल फोन छीन लिया और मौके से फरार हो गए। घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस से मोबाइल की लोकेशन ट्रेस कर बदमाशों तक पहुंचने की गुहार लगाई, लेकिन आरोप है कि पुलिस तत्काल मोबाइल की लोकेशन निकलवाकर कार्रवाई करने में असमर्थ नजर आई।

 

 

घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वारदात के बाद बदमाशों का मोबाइल कुछ समय तक चालू था। पीड़ित लगातार पुलिस से मोबाइल की लोकेशन निकलवाने और उसके आधार पर बदमाशों को पकड़ने की मांग करता रहा। बावजूद इसके तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी।

 

सूचना मिलने पर पहुंचे सिर्फ दो फैंटमकर्मी

स्थानीय लोगों द्वारा घटना की सूचना अर्दली बाजार चौकी पुलिस को दी गई। इसके बाद फैंटम दस्ते के दो पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। पुलिसकर्मी उस दिशा में गए, जिस तरफ बदमाश भागे थे। इसी दौरान पास स्थित पीएमटी कॉलोनी के एक सुनसान ब्लॉक में पुलिस को ऐसी स्थिति मिली, जिसने पूरे इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।

स्थानीय लोगों के अनुसार, ब्लॉक में लंबे समय से कोई नहीं रह रहा है और वहां कई कमरे कथित तौर पर अवांछनीय तत्वों के अड्डे में तब्दील हो चुके हैं। मौके पर शराब और पानी की दर्जनों बोतलें, गांजा पीने में इस्तेमाल होने वाली चिलम, रैपर सहित अन्य सामान मिला। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि कुछ समय पहले तक वहां लोग बैठकर शराब और नशे का सेवन कर रहे थे।

पुलिस के मौके पर पहुंचने की भनक लगते ही वहां मौजूद लोग भाग निकले। आशंका जताई जा रही है कि छिनैती की घटना को अंजाम देने वाले बदमाश भी इसी तरह के सुनसान ठिकानों का इस्तेमाल कर वारदात के बाद छिपने या भागने में करते हैं।

 

रात में इतनी बड़ी घटना, फिर भी मौके पर सिर्फ दो पुलिसकर्मी, नहीं आ सके सक्षम अधिकारी

सबसे बड़ा सवाल पुलिस की तत्काल प्रतिक्रिया को लेकर उठ रहा है। रात करीब एक बजे मारपीट कर मोबाइल छीनने जैसी घटना होने के बाद भी मौके पर महज दो फैंटम पुलिसकर्मियों का पहुंचना चर्चा का विषय बना हुआ है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बदमाशों की दिशा का पता चल गया था और मोबाइल भी घटना के बाद कुछ समय तक चालू था, तो मोबाइल का लोकेशन निकलवाकर अतिरिक्त पुलिस बुलाकर इलाके की घेराबंदी की जा सकती थी। लेकिन आरोप है कि पुलिस इस दिशा में प्रभावी कार्रवाई करने में असमर्थ दिखाई दी।

ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि अगर रात में सुनसान इलाके में अपराधी वारदात कर आसानी से फरार हो सकते हैं और घटना के बाद पुलिस के पास तत्काल अतिरिक्त बल जुटाने की प्रभावी व्यवस्था नहीं है, तो अपराधियों में पुलिस का भय कैसे पैदा होगा?

 

पिछले साल भी इसी जगह युवक से छीना गया था मोबाइल

यह पहली घटना नहीं है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिछले वर्ष तौहीद नामक युवक से भी इसी स्थान पर मोबाइल छीना गया था। आरोप है कि पुलिस ने मामले में महज गुमशुदगी दर्ज कर खानापूर्ति कर दी और घटना की गंभीरता के अनुरूप कार्रवाई नहीं की गई।

लगातार एक ही इलाके में इस तरह की घटनाओं का सामने आना यह सवाल खड़ा करता है कि क्या पुलिस ने इस संवेदनशील स्थान को अपराध की दृष्टि से चिन्हित कर वहां पर्याप्त गश्त और निगरानी की व्यवस्था की है या नहीं।

 

DIG कॉलोनी के मुख्य गेट के सामने भी हो चुकी है ऐसी ही वारदात लेकिन कैन्ट पुलिस ने नहीं लिखा मुकदमा

स्थानीय लोगों के मुताबिक, DIG कॉलोनी के मुख्य गेट के सामने भी मोबाइल छिनैती की घटना सामने आ चुकी है। 13 मार्च 2024 की रात करीब 11 बजे देवगांव से इलाज कराने आए अतीकुर्रहमान का मोबाइल कथित तौर पर बदमाशों ने छीन लिया था।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि घटना के संबंध में लिखित तहरीर देने के बावजूद कैन्ट पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। इतना ही नहीं, पीड़ित का कहना है कि उसका मोबाइल बाद में आगरा में इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन पुलिस ने घटना को गंभीरता से नहीं लिया और कथित तौर पर घटना से ही इनकार कर दिया।

यदि ये आरोप सही हैं, तो यह सिर्फ एक मोबाइल छिनैती का मामला नहीं, बल्कि अपराध के प्रति पुलिस की संवेदनशीलता और शिकायतों पर कार्रवाई की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।

क्या मुकदमा दर्ज न होना बदमाशों का मनोबल नहीं बढ़ाता?

एक ही इलाके में बार-बार मोबाइल छिनैती की घटनाएं, सुनसान इमारतों में कथित रूप से नशेड़ियों और अवांछनीय तत्वों का जमावड़ा और शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों ने कैन्ट थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी व्यक्ति से सरेराह मारपीट कर मोबाइल छीना जाता है और शिकायत के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं होता, तो क्या इससे अपराधियों का मनोबल नहीं बढ़ेगा?

पुलिस की जिम्मेदारी केवल घटना के बाद मौके पर पहुंचने तक सीमित नहीं हो सकती। अपराध होने से रोकने के लिए संवेदनशील स्थानों पर नियमित गश्त, संदिग्ध ठिकानों की निगरानी, घटनाओं में तत्काल मुकदमा दर्ज करना और तकनीकी माध्यमों से अपराधियों तक पहुंचना भी उतना ही जरूरी है।

पुलिस की निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल

DIG कॉलोनी और मकबूल आलम रोड जैसे महत्वपूर्ण इलाके में लगातार ऐसी घटनाओं के आरोप सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है। बुधवार रात की घटना में भी आरोप है कि पुलिस को बदमाशों के भागने की दिशा की जानकारी थी, मोबाइल भी कुछ समय तक सक्रिय था और आसपास संदिग्ध गतिविधियों वाले सुनसान कमरे भी मिले, इसके बावजूद बदमाश पुलिस की पकड़ से बाहर रहे।

अब सवाल यह है कि क्या पुलिस इस पूरे क्षेत्र को अपराध की दृष्टि से संवेदनशील मानकर विशेष निगरानी करेगी? क्या सुनसान पीएमटी कॉलोनी के कमरों की जांच होगी? क्या पिछले मामलों की दोबारा समीक्षा की जाएगी? और सबसे अहम—क्या मोबाइल छिनैती की ताजा घटना में बदमाशों तक पहुंचकर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा?

फिलहाल, घटना के बाद बदमाशों का बेखौफ फरार हो जाना और पुलिस का उन्हें पकड़ने में असफल रहना स्थानीय पुलिसिंग की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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