वाराणसी में मांस-मछली दुकानों के विस्थापन के विरोध में कमिश्नर को सौंपा गया ज्ञापन
माधवी मिश्रा, वाराणसी

वाराणसी, 22 जून 2026: नगर निगम द्वारा शहर के अंदर संचालित मांस-मछली की दुकानों को बाहर स्थानांतरित करने के प्रस्ताव के विरोध में सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, श्रमजीवियों और मांस-मछली व्यवसाय से जुड़े लोगों ने आज कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में इस निर्णय को धर्म और संस्कृति के नाम पर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण का प्रयास बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि वाराणसी एक प्राचीन, बहुलतावादी और धर्मनिरपेक्ष शहर है, जहां सदियों से विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग सौहार्दपूर्ण ढंग से रहते आए हैं। मांस-मछली का व्यापार किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में हिन्दू और अन्य समुदायों के लोग भी इससे जुड़े हुए हैं।
वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि जब स्पेंसर, केएफसी, ब्लिंकिट जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से मांस-मछली घर-घर पहुंचाई जा रही है तो धर्म पर कोई खतरा नहीं है, लेकिन छोटे-मोटे दुकानदारों के व्यापार से अचानक खतरा पैदा हो जाना विरोधाभासपूर्ण और दोहरा मापदंड है।
रोजी-रोटी और अधिकारों पर हमला
उन्होंने कहा कि यह निर्णय हज़ारों दुकानदारों, मजदूरों और विशेष रूप से मछली व्यापार से जुड़ी महिलाओं की रोजी-रोटी पर सीधा हमला है। साथ ही यह आम नागरिकों के अपनी पसंद के भोजन के संवैधानिक अधिकार का भी उल्लंघन है।
नगर निगम द्वारा प्रस्तावित शिवपुर, रामनगर, अवलेशपुर, गणेशपुर और सुजाबाद जैसे 10-15 किलोमीटर दूर क्षेत्रों में दुकानों को स्थानांतरित करने के फैसले को अव्यावहारिक बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि इससे व्यापारियों के साथ-साथ ग्राहकों को भी भारी परेशानी होगी।
राजनीतिक मंशा पर सवाल
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर ऐसे कदमों के जरिए साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण का माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाकर विभाजन की राजनीति स्वीकार्य नहीं है।
ज्ञापन में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें रखी गईं:
– मांस-मछली दुकानों को शहर से बाहर विस्थापित करने के एकतरफा निर्णय पर तत्काल रोक लगाई जाए।
– शहर में पहले से चल रही मंडियों को नियमित किया जाए।
– स्वच्छता और स्वास्थ्य मानकों के अनुसार बिजली, पानी, कचरा प्रबंधन और शीत भंडार की व्यवस्था की जाए।
– दुकानों में शीशे, ग्रीन नेट और फ्लाई कैचर अनिवार्य किए जाएं।
– नगर निगम द्वारा मौजूदा मंडियों के विकास में निवेश किया जाए और विक्रेताओं को पक्की दुकानें आवंटित की जाएं।




