Varanasi

वाराणसी पुलिस कमिश्नर का बड़ा एक्शन: सिंधौरा थाना प्रभारी लाइन हाजिर, विवेचना में लापरवाही पर सरैंया चौकी प्रभारी निलंबित, पंकज पाण्डेय को मिला सिंधौरा का चार्ज

श्रावण मास की तैयारियों, अपराध नियंत्रण और समयबद्ध विवेचना की समीक्षा बैठक में पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने दिए कड़े निर्देश, संगठित अपराधियों पर गैंगस्टर और संपत्ति जब्ती की कार्रवाई तेज करने का आदेश

आरिफ़ अंसारी, वाराणसी

 

 

वाराणसी। पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी मोहित अग्रवाल ने शुक्रवार को कैंप कार्यालय में राजपत्रित अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध विवेचना तथा आगामी श्रावण मास की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट संदेश दिया कि अपराध नियंत्रण और विवेचना में किसी भी स्तर की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय सीमा में विवेचना पूरी करना प्रत्येक विवेचक की जिम्मेदारी है और इसमें अनावश्यक देरी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बैठक के दौरान पुलिस आयुक्त ने विभिन्न थाना क्षेत्रों की अपराध स्थिति, लंबित विवेचनाओं, संगठित अपराध के विरुद्ध चल रही कार्रवाई, रात्रि गश्त, ऑपरेशन चक्रव्यूह तथा आगामी श्रावण मास की तैयारियों की बिंदुवार समीक्षा की। समीक्षा के दौरान सामने आई लापरवाही पर उन्होंने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए दो पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाए।

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सिंधौरा हत्याकांड में लापरवाही पर थाना प्रभारी लाइन हाजिर

बैठक में 2 जुलाई 2026 को थाना सिंधौरा क्षेत्र में हुई सनसनीखेज हत्या की घटना की समीक्षा की गई। इस दौरान घटना के बाद अपेक्षित स्तर पर प्रभावी कार्रवाई न किए जाने पर प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने के कारण थाना प्रभारी सिंधौरा निरीक्षक ज्ञानेन्द्र कुमार त्रिपाठी को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया। साथ ही थाना सिगरा के नगर निगम चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक पंकज कुमार को नया थानाध्यक्ष सिंधौरा नियुक्त किया गया, ताकि हत्या के मामले की प्रभावी जांच एवं अपराध नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।

1060 दिन तक विवेचना लंबित रखने पर चौकी प्रभारी सरैंया निलंबित

पुलिस आयुक्त ने विवेचनाओं के समयबद्ध निस्तारण में गंभीर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की। जैतपुरा थाना क्षेत्र की सरैयां चौकी के प्रभारी उपनिरीक्षक सत्यदेव गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। जांच में सामने आया कि उन्होंने निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद पांच विवेचनाओं को क्रमशः 23 दिन, 826 दिन, 884 दिन, 939 दिन तथा 1060 दिन तक लंबित रखा। पुलिस आयुक्त ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि ऐसी कार्यशैली पुलिस विभाग की कार्यक्षमता और जनता के विश्वास दोनों को प्रभावित करती है।

60 और 90 दिन की समय सीमा का सख्ती से होगा पालन

बैठक में पुलिस आयुक्त ने निर्देश दिए कि सामान्य प्रकृति के अपराधों की विवेचना अधिकतम 60 दिनों तथा जघन्य अपराधों की विवेचना 90 दिनों के भीतर हर हाल में पूरी की जाए। यदि किसी विवेचना में अनावश्यक विलंब पाया गया तो संबंधित विवेचक और पर्यवेक्षण अधिकारी दोनों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण विवेचना के माध्यम से ही अपराधियों को न्यायालय से सजा दिलाई जा सकती है।

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संगठित अपराधियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

पुलिस आयुक्त ने निर्देश दिया कि हत्या, माफिया गतिविधियों, साइबर अपराध, एनडीपीएस तस्करी, गोवध तथा अन्य संगठित अपराधों में शामिल अपराधियों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट, गुण्डा एक्ट, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) तथा संपत्ति जब्ती जैसी कठोर वैधानिक कार्रवाई प्राथमिकता के आधार पर की जाए। गैंगस्टर अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की विवेचना अधिकतम दो माह के भीतर पूरी कर न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए।

अपराध नियंत्रण के लिए चार मूल मंत्र

पुलिस आयुक्त ने अधिकारियों को अपराध नियंत्रण के लिए चार प्रमुख बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने को कहा—

  • पुराने एवं पेशेवर अपराधियों की लगातार निगरानी रखी जाए और उनकी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण किया जाए।
  • ऑपरेशन चक्रव्यूह के तहत दिन और रात लगातार सघन चेकिंग अभियान चलाया जाए।
  • रात्रि गश्त को और अधिक प्रभावी बनाते हुए बिना नंबर प्लेट चलने वाले वाहन, स्टंट करने वाले युवकों तथा तीन सवारी चलने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
  • चोरी एवं नकबजनी की घटनाओं को भी हत्या और लूट जैसे गंभीर अपराधों की श्रेणी में रखते हुए प्रत्येक घटना का एसीपी एवं थाना प्रभारी स्वयं निरीक्षण करें तथा 24 घंटे के भीतर खुलासे का हरसंभव प्रयास करें।

एसआर केसेज और गैंगस्टर मामलों को प्राथमिकता

बैठक में निर्देश दिए गए कि एसआर (स्पेशल रिपोर्ट) श्रेणी के मामलों का त्वरित अनावरण कर अभियुक्तों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। ऐसे मामलों की प्रतिदिन मॉनिटरिंग की जाएगी। वहीं गैंगस्टर एक्ट से जुड़े सभी मामलों का दो माह के भीतर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

श्रावण मास को लेकर विशेष सतर्कता

आगामी श्रावण मास और कांवड़ यात्रा को देखते हुए पुलिस आयुक्त ने सभी पुलिस अधिकारियों को कांवड़ मार्गों एवं संवेदनशील स्थलों का स्वयं निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अधिकारी को मार्ग, डायवर्जन, संवेदनशील बिंदुओं तथा स्थानीय परिस्थितियों की पूरी जानकारी होनी चाहिए। बैरिकेडिंग, प्रकाश व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरे, पेयजल, चिकित्सा सहायता एवं अन्य व्यवस्थाओं की समय से समीक्षा कर सभी कमियों को दूर किया जाए।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी तथा उनके साथ शालीन, सम्मानजनक और सौहार्दपूर्ण व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। इस संबंध में अधीनस्थ पुलिसकर्मियों को पहले से आवश्यक ब्रीफिंग देने के भी निर्देश दिए गए।

सोशल मीडिया और ट्रैफिक पर भी विशेष फोकस

पुलिस आयुक्त ने अधिकारियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अफवाह फैलाने, भ्रामक सूचना प्रसारित करने अथवा सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले तत्वों के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा श्रावण मास के दौरान शहर की यातायात व्यवस्था सुचारु बनाए रखने, जाम की स्थिति से बचने तथा आम नागरिकों को न्यूनतम असुविधा हो, इसके लिए ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद

समीक्षा बैठक में अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था एवं मुख्यालय) शिवहरी मीणा, अपर पुलिस आयुक्त (अपराध) आलोक प्रियदर्शी, पुलिस उपायुक्त काशी जोन गौरव बंशवाल, पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन प्रमोद कुमार, पुलिस उपायुक्त गोमती जोन नीतू, पुलिस उपायुक्त सुरक्षा अनिल कुमार यादव सहित कमिश्नरेट के सभी राजपत्रित अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक के अंत में पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने दोहराया कि कमिश्नरेट वाराणसी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने, समयबद्ध विवेचना सुनिश्चित करने और आमजन का पुलिस पर विश्वास मजबूत करने के लिए सभी अधिकारी पूरी जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ कार्य करें।

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